केजरीवाल की गिरफ्तारी पर इतना बवाल क्यों ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। ईडी ने कई नोटिस देने के बाद हाजिर नहीं होने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गत दिनों गिरफ्तार कर लिया। दिल्ली शराब नीति घोटाले में। इसमें सच क्या है और झूठ क्या है, यह तो मुकम्मल जांच और कोर्ट के निर्णय के बाद ही मालूम चलेगा। लेकिन इतना तय है कि भाजपा की केन्द्र सरकार ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स जैसी केन्द्रीय एजेंसियों का विपक्षी नेताओं को लेकर दुरूपयोग कर रही है।
इसका सबूत यह है कि पिछले 10 साल में इन एजेंसियों ने एक भी भाजपा नेता को नहीं पकड़ा। क्या भाजपा के सभी नेता जो मंत्री और मुख्यमंत्री जैसे बड़े ओहदों पर रहे हैं या आज विराजमान हैं दूध के धुले हुए हैं ? यकीनन नहीं हैं। किसी से छुपा हुआ नहीं है कि भाजपा में भी एक से बढ़कर एक भ्रष नेता मौजूद हैं, जिन्होंने अकूत संपत्ति सत्ता के दुरूपयोग से प्राप्त की है। लेकिन उनमें से एक को भी नहीं पकड़ा गया है।
दूसरी बात यह है कि जिन विपक्षी नेताओं को भाजपा के नेता खुलेआम बड़े भ्रष्टाचारी कहते हैं, वे भाजपा में शामिल होते ही पाक पवित्र हो जाते हैं। उनको एजेंसियों की पकड़ धकड से मुक्त कर दिया जाता है। इस रवैए को देखते हुए यह स्पष्ट है कि केन्द्रीय एजेंसियों का दुरूपयोग हो रहा है और उनकी जद में अधिकतर विपक्षी नेता ही रहते हैं।
केजरीवाल ने अगर भ्रष्टाचार किया है शराब नीति को लेकर, तो बहुत ग़लत किया है और इसके लिए उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि उनकी पार्टी की तो स्थापना ही भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई थी। केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर लोग उनके पक्ष में खूब लिखने और बोलने लग गए। जो उनका अधिकार है। केजरीवाल के इन समर्थकों में अच्छी खासी संख्या मुसलमानों की भी है, जो सोशल मीडिया पर उनका बचाव कर रहे हैं।
लेकिन केजरीवाल के बचाव में उतरे लोगों को सोचना चाहिए कि केजरीवाल कब किसी पीड़ित के पक्ष में खड़े हुए हैं ? इन्होंने लोगों की अथक मेहनत और उम्मीदों से खड़ी की आम आदमी पार्टी को जेबी संस्था बना लिया। हर ज़ुल्म व नाइंसाफी पर ख़ामोश रहे, यहां तक दिल्ली के मुख्यमंत्री होते हुए दिल्ली दंगा पीड़ितों के लिए मुंह तक नहीं खोला।
यही हाल केजरीवाल का CAA, NRC, अनुच्छेद 370, तीन तलाक़ काला कानून, UAPA, आरक्षण , जातीय जनगणना आदि मुद्दों पर रहा है। हर ज़ुल्म पर केजरीवाल ने खामोशी की पट्टी बांध ली, ख़ासकर अल्पसंख्यकों से सम्बंधित मुद्दों पर। पार्टी को अपने कब्जे में करने के लिए संघर्ष के साथियों को धक्के मारकर पार्टी से बाहर कर दिया। ऐसी स्थिति में केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर ज्यादा बवाल नहीं मचाना चाहिए। इनका उमर खालिद, शरजील इमाम आदि की गिरफ्तारी पर जो रवैया रहा है, वो किसी से छुपा हुआ नहीं है। जब केजरीवाल मुख्यमंत्री जैसे बड़े ओहदे पर रहते हुए किसी मजलूम के हक में दो शब्द नहीं बोल सके, तो फिर मजलूमों के समर्थकों को भी केजरीवाल के लिए खामोश रहना चाहिए, ताकि इन्हें एहसास हो कि मजलूमों का जाति धर्म देखकर नहीं बल्कि मजलूम समझकर साथ देना चाहिए।
(24/03/2024)
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