नेताओं की लफ्फाजी और विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश का चुनाव

नेताओं की लफ्फाजी और विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश का चुनाव

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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। हमारे देश भारत को विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश कहा जाता है, क्योंकि यहां 97 करोड़ वोटर हैं, इतनी आबादी चीन को छोड़कर किसी भी देश की नहीं है। यहां ग्राम और वार्ड से लेकर विधानसभा और लोकसभा तक के चुनाव हर पांच साल में पाबंदी से होते हैं। हारने वाला सत्ताधीश उसी दिन कुर्सी छोड़ देता है और नए पदाधिकारी व्यवस्था को संभाल लेते हैं। इतनी बड़ी और पारदर्शी चुनाव व्यवस्था विश्व के किसी भी देश में नहीं है। जिसके लिए सभी देशवासियों को फख्र है।


सके बावजूद सबसे बड़ी दुखदाई स्थिति यह है कि इस लोकसभा चुनाव में जनहित के मुद्दों पर बात कम हो रही है और नेताओं की लफ्फाजी और एक दूसरे पर गैर जरुरी आरोप प्रत्यारोपों की बौछार जमकर हो रही है। विचित्र बात यह है कि इस जबानी जमा खर्च में कोई कम नहीं है। चाहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हों, या राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी या फिर मायावती। सभी सियासी मंचों से लफ्फाजी कर रहे हैं।

हम लोकसभा चुनाव कवरेज के लिए राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की दर्जनों सीटों पर गए हैं। वहां अनगिनत लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आईं। महंगाई, बेरोजगारी और विभिन्न प्रकार के अन्याय, अत्याचार से लोग दुखी हैं। किसान, मजदूर, धड़ी ठेले वाले, छोटे व्यापारी और उच्च शिक्षित बेरोजगार युवक युवतियां सभी दुखी हैं। सब चाहते हैं कि अच्छे दिन आएं, लेकिन आएं कैसे ? क्योंकि सत्ता जिनके हाथ में है और रही है उनकी नीयत ही अच्छे दिन लाने की नहीं है। उन्हें तो सिर्फ राज चाहिए, जो कैसे भी मिले मिल जाए। यह जो चिंता की लकीरें माथे पर लिए हुए लोग हैं, उनकी जाति धर्म और रंग रूप व क्षेत्र कुछ भी हो सकता है, लेकिन एक बात इन सब में समान है और वो है कि यह सब अभावग्रस्त हैं। अभाव ही इनकी जाति और पहचान है।

राहुल गांधी कांग्रेस के गारंटी कार्ड और विभिन्न प्रकार के न्याय की बात कर रहे हैं, वे जातीय जनगणना और जिसकी जितनी भागीदारी उतनी उसकी हिस्सेदारी की बात कह रहे हैं। वे असमानता और ग़रीबी के खात्मे की बात कह रहे हैं। सवाल यह है कि 55 साल पहले 1971 में आपकी दादी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ का नारा लगाया, आपकी दादी जी और पिताजी दोनों प्रधानमंत्री रहे, फिर गरीबी हटाने से किसने रोका ? 55 साल आपकी कांग्रेस पार्टी का शासन रहा किसने लोगों के साथ न्याय करने और उन्हें हिस्सेदारी देने से रोका ? छह महीने पहले आपका राजस्थान और छत्तीसगढ़ में शासन था, किसने आपको वहां जातीय जनगणना करने से रोका ?

अखिलेश यादव कह रहे हैं कि हम समाजवादी हैं, हम सबको बराबर मानते हैं, हम किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करते हैं। तो फिर उत्तर प्रदेश का यह हाल क्यों है ? वहां के लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें क्यों हैं ? वहां तीन बार आपके पिताजी मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री रहे हैं और एक बार आप खुद मुख्यमंत्री रहे हैं। उतारते समाजवाद को धरातल पर, किसने रोका ? आपने पांच टिकट अपने परिवार को दी हैं, इसके अलावा एक भी यादव उम्मीदवार नहीं उतारा, आपने सिर्फ 4 टिकट मुस्लिम को दिए हैं, क्या यही आपका समाजवाद है ? आप लोगों ने प्रधानमंत्री द्वारा कहे जा रहे मुस्लिम आरक्षण के झूठे मुद्दे पर खामोशी की चादर ओढ़ ली है, क्या यही समाजवाद है ?

ममता बनर्जी तीसरी बार लगातार बंगाल की मुख्यमंत्री हैं, बातें वे भी मंच से खूब करती हैं। क्या वे बताएंगी कि आपके पूर्ण बहुमत के लगातार शासन के बावजूद आज बंगाल का आम आदमी चिंता के बोझ तले क्यों दबा जा रहा है ? मायावती जो चुनाव के वक्त बाहर निकली हैं, सभाओं में बाबा साहेब अम्बेडकर, संविधान, आरक्षण, सामाजिक बराबरी आदि की बात कर रही हैं। लेकिन क्या वे यह बताने की हिम्मत करेंगी कि विभिन्न प्रकार के अन्याय व अत्याचार पर आपने पांच साल में कितने धरने प्रदर्शन किए ? कब कब अपना मुंह खोला ? यही हाल आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल का है और ऐसा ही शरद पवार और कमोबेश दूसरे बड़े विपक्षी नेताओं का है।

अब बात करें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की। दस साल पूर्ण बहुमत की सरकार चलाने का उन्हें मौका मिला, किसी ने भी जनता का भला करने के मुद्दे पर उनका हाथ नहीं पकड़ा। 2014 में उन्होंने अच्छे दिन आने वाले हैं का नारा दिया। बहुत हुई महंगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार जैसे नारे महिलाओं और बेरोजगारों के सम्बन्ध में भी दिए। विदेशों में जमा कालाधन वापस लाकर 15 लाख रुपए हर भारतीय के खाते में डालने की जुमलेबाजी भी की। हुआ क्या ? उस पर आज भी सवालिया निशान लगा हुआ है।

सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की बात 2019 के चुनाव में प्रधानमंत्री ने कही, लेकिन 2024 के चुनाव में बिना सिर पैर की मुस्लिम आरक्षण की झूठी बात को वे बार बार मंच से दोहरा रहे हैं। देश में कहीं भी मुस्लिम आरक्षण नहीं मिला हुआ है। ओबीसी आरक्षण में ओबीसी मुस्लिम जातियों को जरूर आरक्षण मिला हुआ है, जो गुजरात में भी मिला हुआ है और राजस्थान में भी और अन्य राज्यों में भी। राजस्थान में तो यह आरक्षण भारतीय जनता पार्टी की सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैंरोसिंह शेखावत ने दिया था। कर्नाटक में जनता दल सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री एच डी देवगौड़ा ने यह आरक्षण दिया था, जो आज भाजपा के गठबंधन में सहयोगी बने हुए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात कही थी। आज 2024 चल रहा है, क्या किसानों की आमदनी दोगुनी हो गई ? प्रधानमंत्री ने 2014 के चुनाव में हर वर्ष दो करोड़ नौकरियां देने की बात कही थी, क्या दस साल में बीस करोड़ नौकरियां दे दी ? प्रधानमंत्री चाहते तो बहुत कुछ हो सकता था, विपक्षी दल चाहते तो बहुत कुछ कर सकते थे, जब वे सत्ता में रहे। आज देश में करोड़ों लोग अभावग्रस्त हैं, उनके नाम पर लफ्फाजी करने की बजाए उनके दामन में खुशियां भरने का वक्त है।
(09/05/2024)
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