जालोर सिरोही लोकसभा क्षेत्र से हार वैभव गहलोत की या अशोक गहलोत की ?
************************
जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान की जालोर सिरोही लोकसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत कांग्रेस के उम्मीदवार थे और वे चुनाव हार गए। चुनाव भी दो लाख से अधिक वोटों से हारे। ऐसी करारी हार की उम्मीद किसी को नहीं थी। "थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका" की टीम इस क्षेत्र में चुनाव के दौरान तीन दिन रही और स्थिति स्पष्ट नजर आ रही थी कि वभैव गहलोत चुनाव हारेंगे। हमने तब हमारे एपिसोड में इस बात का इशारा भी किया था कि वैभव गहलोत की स्थिति कमजोर है। हमने कुछ साथियों को यह भी कहा था कि हार एक लाख से कम नहीं रहेगी। अब वे साथी मजाक में कह रहे हैं कि आप ग़लत साबित हुए, हार तो दो लाख से ज्यादा की हो गई।
.jpg)
खैर, मुद्दा यह नहीं है कि हार कितने वोटों से हुई ? मुद्दा यह है कि यह हार वैभव गहलोत की है या अशोक गहलोत की ? अशोक गहलोत के तमाम चेलों की जो बयानबाजी थी कि बड़े अन्तर से चुनाव जीत रहे हैं, वो ग़लत साबित कैसे हुए ? इसका पहला कारण तो यह था कि अशोक गहलोत को छोड़कर बाकी सब कांग्रेसी अतिउत्साह का शिकार थे और उन्होंने भाजपा उम्मीदवार लुंबाराम चौधरी को बहुत हल्के में लिया। दूसरा कारण इस हार यह था कि बाहरी उम्मीदवार का मुद्दा हावी रहा और जातीय समीकरण भी गहलोत के फेवर में नहीं थे। तीसरा कारण यह था अशोक गहलोत ने पिछले 25 साल में जिन जिन नेताओं के सियासी तिलक निकालकर उन्हें हाशिए पर लगाया उन सभी ने इस चुनाव में अशोक गहलोत के सियासी तिलक निकाल दिया।
इस करारी हार का चौथा कारण खुद अशोक गहलोत और उनके चेले हैं, जिन्होंने पांच साल के राज में जमकर लूट मचाई और सत्ता के नशे में किसी से सम्मानपूर्वक राम राम भी नहीं की। सबको ठेंगे पर रखा। पांचवां कारण वैभव गहलोत को उच्च शिक्षित और पूर्व मुख्यमंत्री का बेटा बताकर प्रचार करना तथा लुंबाराम चौधरी को अनपढ़ और सरपंच लेवल का आदमी बताकर कम शिक्षित और ग्रामीण परिवेश के लोगों का अपमान करना रहा।
छठा कारण यह रहा कि चुनाव की कमान जिन लोगों के हाथ में थी उनकी जालोर सिरोही लोकसभा क्षेत्र में वैभव गहलोत को 50 वोट दिलाने की हैसियत नहीं थी। इन लोगों की जाति के तो दूर की बात रिश्तेदारों ने भी कांग्रेस को वोट नहीं दिया। परिणाम के बाद चर्चा में आए तमाम आंकड़े इस बात के गवाह हैं।
इस हार का अशोक गहलोत को पता था, इसीलिए उन्होंने अपनी अधिकतर सभाएं इस क्षेत्र में की और गांव गांव घर घर उन्होंने बेटे के लिए वोट मांगे। उन्होंने प्रचार के लिए हनुमान बेनीवाल को भी बुलाया और उन तमाम लोगों को फोन कर यहां साथ देने की बात कही जिनसे वोट मिलने की सम्भावना थी। इसके बावजूद वैभव गहलोत चुनाव हार गए। यह हार वैभव गहलोत की ही नहीं अशोक गहलोत की भी है, जिन्होंने अपनी घोड़ी छाया में बांधने के लिए सबकी घोड़ियों के खूंटे उखाड़ दिए।
इस चुनाव में गहलोत ने सब कुछ दांव पर लगा दिया था, वे हर हाल में वैभव को लोकसभा भेजना चाहते थे, क्योंकि वैभव पिछला चुनाव जोधपुर से हार गए थे और इस बार सीट बदली थी। लेकिन पार नहीं पड़ी। पूरे राजस्थान से जो चेले लगे हुए थे, वे भी एक आराम पसंद गिरोह साबित हुए, जिनमें बहुत से तो सिर्फ शक्ल दिखाने के लिए और सोशल मीडिया पर फोटो डालने के लिए जालोर आए थे।
10/06/2024
-----------------------------------
➡️अगर आपको हमारा यह लेख/खबर पसंद आया हो, तो प्लीज इसे शेयर/फॉरवर्ड कीजिए और साथ ही हमारे अखबार की आर्थिक मदद भी कीजिए।
अकाउंट डिटेल्स:- इकरा पत्रिका
IKRA PATRIKA
PNB, MUSLIM SR. SEC. SCHOOL, MOTI DUNGARI ROAD, JAIPUR.
-------------------------------------------
➡️इकरा पत्रिका को सहयोग राशि आप Paytm, Phone Pay और Google Pay से भी भेज सकते हैं। फोन नम्बर
9414361522 पर (अकाउंट Farooq Ali Khan)
--------------------------------------------
©️ Copyright :- इस सम्पूर्ण लेख/खबर को या इसके किसी पैराग्राफ़ को हुबहू या तोड़ मरोड़ कर प्रकाशित करना मना है। अलबत्ता आप चाहें तो लेखक और हमारे अखबार के नाम के साथ इस सम्पूर्ण लेख/खबर को सोशल मीडिया पर शेयर जरूर कर सकते हैं।
--------------------------------------------
-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।
©️ Copyright Thar News & Ikra Patrika.
All Rights Reserved.
Comments
Post a Comment