चूरू, झुंझुनूं, सीकर, नागौर और गंगानगर में भाजपा क्यों हारी ?

चूरू, झुंझुनूं, सीकर, नागौर और गंगानगर में भाजपा क्यों हारी ?

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चूरू/झुंझुनूं/सीकर/नागौर/गंगानगर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत का परचम लहराने वाली भारतीय जनता पार्टी को इस बार 11 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। इन 11 सीटों में 5 सीट उत्तरी राजस्थान की हैं। गंगानगर, चूरू, झुंझुनूं, सीकर और नागौर। इनकी सीमा आपस में मिली हुई है। इन पर भाजपा और कांग्रेस दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई थी।


भाजपा की प्रतिष्ठा इसलिए दांव पर लगी हुई थी कि वो इन सभी सीटों को जीतना चाहती थी और परिस्थितियां विपरीत बनी हुई थीं, क्योंकि कुछ स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों के कारण भाजपा को इन सीटों पर अपनी स्थिति कमजोर लग रही थी। कांग्रेस की प्रतिष्ठा इसलिए दांव पर लगी हुई थी कि उसने इन पांच में से दो सीटें सहयोगियों के लिए छोड़ दी थी तथा पांच महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इस इलाके में कांग्रेस मजबूत स्थिति में थी।

इन सीटों पर भाजपा की हार का पहला कारण आरक्षण खत्म होने के डर से दलित वोटों का भाजपा के खिलाफ लामबंद होना। किसान आंदोलन और महिला पहलवानों और अग्निवीर जैसे मुद्दों को लेकर जाट समुदाय का भी बड़ी संख्या में भाजपा के खिलाफ एकजुटता दिखाना। भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं द्वारा लगातार मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने से मुस्लिम समुदाय का भी एकजुटता से भाजपा के खिलाफ वोटिंग करना, जबकि इस इलाके में मुस्लिम वोट हर चुनाव में अच्छी संख्या में भाजपा को पड़ता आया है।

इसके अलावा स्थानीय भाजपा नेताओं का भितरघात भी खेल बिगाड़ने में पूरी तरह सहयोगी बना, हालांकि हार जरूर हुई है, लेकिन जीत का अन्तर गंगानगर को छोड़कर बाकी चार सीटों पर 73 हजार से कम का रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस अन्तर को पाटना कोई बड़ा काम नहीं था, लेकिन रणनीतिक तौर पर भाजपा इसमें असफल रही और उसने कुछ ऐसी गलतियां की जिसकी वजह से उसने यह पांचों सीटें खो दी। जीत का अन्तर गंगानगर में 88153 वोट, चूरू में 72737, झुंझुनूं में 18235, सीकर में 72896 और नागौर में 42225 वोटों का रहा।

गंगानगर और चूरू में कमजोर उम्मीदवार उतारना, चूरू में स्थापित सांसद राहुल कस्वां की भाजपा द्वारा टिकट काटना और फिर कांग्रेस की टिकट लेकर राहुल कस्वां के मैदान में उतरने से सहानुभूति का माहौल बनना, यहां चुनाव भाजपा ने अपनी ग़लती से राहुल कस्वां बनाम राजेन्द्र राठौड़ बना दिया। जिससे परिणाम पहले दिन से ही विपरीत लग रहे थे।

सीकर में जमीन से जुड़े हुए किसी ऊर्जावान सक्षम युवा को उतारते तो बात बन सकती थी, लेकिन बाबा का टिकट रिपीट कर भाजपा नेतृत्व ने यह गलती की। झुंझुनूं से मुस्लिम उम्मीदवार और नागौर से राजपूत उम्मीदवार उतारते तो जीत 100 प्रतिशत सुनिश्चित थी।

इन पांचों सीटों पर एक विचित्र चर्चा चुनाव प्रचार के दौरान चल रही थी। जब "थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका" की टीम इस इलाके में ग‌ई थी, तो जमीन से जुड़े हुए कुछ स्थानीय राजनीतिक जानकार यह स्पष्ट कह रहे थे कि यहां भाजपा को भाजपा ही हराएगी। यानी इन सीटों पर भाजपा के कुछ पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के चेले यहां पूरी तरह सेंधमारी करेंगे तथा परिणाम के दिन यह बात सच भी साबित हो गई।
(18/06/2024)
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