राजस्थान की पांच विधानसभा सीटों और एक राज्यसभा सीट पर होंगे उप चुनाव

राजस्थान की पांच विधानसभा सीटों और एक राज्यसभा सीट पर होंगे उप चुनाव

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कांग्रेस, भाजपा, भारतीय आदिवासी पार्टी और आर‌एलपी की प्रतिष्ठा होगी दांव पर
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कौन हैं प्रमुख दावेदार ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। लोकसभा चुनाव 2024 का परिणाम 04 जून को घोषित होते ही राजस्थान में पांच विधानसभा सीटों और एक राज्यसभा सीट पर उप चुनाव होने भी तय हो गए हैं, क्योंकि राजस्थान से पांच ऐसे नेता सांसद बने हैं, जो वर्तमान में विधायक भी हैं तथा प्रदेश के एक राज्यसभा सांसद केरल से लोकसभा सांसद चुन लिए गए हैं।


नमें झुंझुनूं लोकसभा सीट से कांग्रेस के सिम्बल पर सांसद बने बृजेन्द्र ओला, जो कि वर्तमान में झुंझुनूं विधानसभा सीट से विधायक हैं। नागौर से सांसद बने आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल, जो कि अपनी ही पार्टी से यहां की खींवसर विधानसभा सीट से विधायक हैं। दौसा से सांसद बने मुरारीलाल मीणा, जो कि यहां से कांग्रेस पार्टी के अभी विधायक हैं। टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के सांसद बने हरीश मीणा, जो कि यहां की देवली उनियारा सीट से विधायक हैं। बांसवाड़ा डूंगरपुर सीट से सांसद बने भारतीय आदिवासी पार्टी के नेता राजकुमार रोत जो कि यहां की चौरासी विधानसभा सीट से विधायक हैं।

इसी तरह कांग्रेस संगठन महासचिव और राजस्थान से राज्यसभा सांसद के सी वेणुगोपाल केरल से लोकसभा सांसद चुने गए हैं। इससे राजस्थान की इस राज्यसभा सीट पर भी अब उप चुनाव होगा। इस तरह राजस्थान में पांच सीटों पर विधानसभा उप चुनाव और एक सीट पर राज्यसभा उप चुनाव होगा। विधानसभा सीटों में झुंझुनूं, खींवसर, दौसा, चौरासी और देवली उनियारा सीट हैं, जहां अगले चार पांच महीने में उप चुनाव होना है।

इन सीटों पर दावेदारी अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ जगह न‌ए लोग सक्रिय होने लग ग‌ए हैं और कुछ जगह नव निर्वाचित सांसदों के परिवार के लोग ही उम्मीदवार समझे जा रहे हैं। कांग्रेस के सियासी गलियारों में झुंझुनूं, दौसा और देवली उनियारा सीट के बारे में चर्चा यह है कि इन तीनों सीटों पर विपरीत परिस्थितियों में कांग्रेस के यह विधायक लोकसभा का चुनाव जीते हैं, इसलिए पार्टी इन्हीं के किसी परिजन या पसंदीदा नेता को उम्मीदवार बनाएगी।

जहां तक खींवसर विधानसभा सीट की बात है तो 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद हनुमान बेनीवाल ने अपने भाई को यहां से उप चुनाव लड़वाया था और वे विजयी हुए थे, तो इस बार भी सम्भावना यही है कि बेनीवाल अपने भाई या अन्य किसी परिजन को ही अपनी पार्टी से उप चुनाव में उम्मीदवार बनाएंगे। यही हाल चौरासी सीट का भी है, यहां आदिवासी पार्टी की तरफ से राजकुमार रोत की पसंद का व्यक्ति ही उम्मीदवार होगा। हालांकि यह बात भी स्पष्ट रूप से चुनाव घोषणा के बाद ही सामने आएगी कि खींवसर और चौरासी सीट पर कांग्रेस अपने उम्मीदवार उतारेगी या फिर अपने गठबंधन के साथियों का समर्थन करेगी।

जहां तक भाजपा का सवाल है तो वो इन पांचों विधानसभा सीटों पर हारे हुए उम्मीदवारों को भी मौका दे सकती है और न‌ए उम्मीदवार भी उतार सकती है। राज्यसभा सीट बहुमत को देखते हुए भाजपा के पास जानी तय है। लेकिन बाहरी उम्मीदवार होगा या प्रदेश का यह समय बताएगा। बाहरी उम्मीदवार का विरोध हो सकता है, क्योंकि कुछ बड़े स्थानीय नेता दावेदारी के लिए तैयारी कर रहे हैं।

विधानसभा उप चुनावों में कांग्रेस, भाजपा, आदिवासी पार्टी और आर‌एलपी चारों पार्टियों की प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी। क्योंकि इनमें तीन सीट कांग्रेस के पास हैं और एक एक आदिवासी पार्टी और आर‌एलपी के पास है। भाजपा की प्रदेश में सरकार है और अमूमन उप चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी ही विजयी होती रहती है। इसलिए कुछ महीनों बाद इन उप चुनावों में दिलचस्प मुकाबला होगा और उसमें हार जीत पक्ष व विपक्ष दोनों के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा होगा।
(08/06/2024)
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