पेपर लीक मामले में भजनलाल सरकार को और आगे बढ़ना होगा...
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आरपीएससी और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की परत परत में छुपी हुई दलाली की सड़ांध को मुकम्मल साफ करना होगा और इसके लिए बड़ी मछली ही नहीं बड़े मगरमच्छों को भी पकड़ना होगा। तब भर्ती व्यवस्था से युवाओं का भरोसा जुड़ेगा।
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। करीब छह महीने पहले राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट में पेपर लीक के मुद्दे पर एसआईटी का गठन किया। यह कदम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बहुत ही सराहनीय कदम था। तब से लेकर आज तक पेपर लीक के कई बड़े दलालों और मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 7 जुलाई को एक कार्यक्रम में कहा कि "पेपर लीक करने वालों पर कार्रवाई जारी रहेगी, एसआईटी ने ठोस कार्रवाई करते हुए अब तक पेपर लीक और अन्य अनियमितता करने वाले 108 आरोपियों को पकड़ा है। युवाओं के सपनों को तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। पिछली कांग्रेस सरकार में 17 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, युवाओं के सपनों को तोड़ने वालों को हम छोड़ेंगे नहीं, पिछली सरकार ने कड़ी मेहनत करने वाले ईमानदार विद्यार्थियों का मनोबल तोड़ दिया था।"
मुख्यमंत्री का उक्त भाषण और युवाओं को भरोसा दिलाने का वादा और पेपर लीक पर कड़ी कार्रवाई जारी रखना सब कुछ बहुत सराहनीय है। लेकिन जब तक युवाओं का मनोबल तोड़ने वाले बड़े मगरमच्छों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक यह मनोबल नहीं जुड़ेगा। यह किसी से छुपा हुआ नहीं है कि अशोक गहलोत के गत शासन में राजस्थान में सरकारी भर्तियों में जो धांधली और चोर बाजारी हुई है वैसी शायद ही देश में पहले कभी हुई होगी ? जिनको कुछ नहीं आता उन्हें माल के बदले अधिकारी बना दिया गया। जो सिपाही बनने लायक नहीं उन्हें थानेदार बना दिया गया, जो बाबू बनने की योग्यता नहीं रखते उन्हें एसडीएम बना दिया गया।
राजस्थान में सरकारी भर्तियों में अनियमितता और पेपर लीक पहले भी हुए हैं, लेकिन पिछले पांच साल में तो नौकरी के इस लूट बाजार ने सारी हदें पार कर दी। राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में पेपर लीक, इंटरव्यू और नौकरी के बदले माल बटोरने और भाई भतीजावाद करने का खेल बहुत पुराना है, जब तक इसकी तह में नहीं जाया जाएगा, वहां की हर परत से दलाली और लूट खसोट की सड़ांध को मुकम्मल साफ नहीं किया जाएगा, तब तक बड़ी सफलता नहीं मिलेगी।
आज सरकारी नौकरी की भर्ती व्यवस्था से योग्य युवक-युवतियों का भरोसा उठ गया है, क्योंकि कई बार प्रतियोगी परीक्षा देने के बाद अयोग्य अभ्यर्थियों का पद और पैसे के रसूख से चयन हो जाए तथा ईमानदारी से कड़ी मेहनत करने वाले योग्य युवक-युवतियां बार बार फेल हो जाएं तो भर्ती व्यवस्था से भरोसा तो उठेगा ही।
राजस्थान में सरकारी नौकरी की इस लूट में कुछ बड़े कोचिंग संस्थान भी शामिल हैं, अगर ईमानदारी से जांच हुई तो आए दिन बड़े बड़े विज्ञापन जारी करने वाले कुछ कोचिंग संस्थानों के मालिक इस गंदे तालाब की बड़ी मछलियां साबित होंगे और उनके राजनीतिक आका इस पूरे काले खेल के मगरमच्छ साबित होंगे तथा जब तक इन बड़ी मछलियों और मगरमच्छों के जबड़े में कानून का हाथ नहीं डाला जाएगा तब तक युवाओं का भरोसा नहीं जुड़ेगा और भर्ती व्यवस्था में फैली गंदगी साफ नहीं होगी।
अगर ईमानदारी से ऊपर तक जांच हुई तो आरपीएससी और कर्मचारी चयन बोर्ड के बड़े बड़े पदाधिकारी ही नहीं बल्कि कुछ पूर्व मंत्री, कुछ पूर्व विधायक और यहां तक कि मुख्यमंत्री स्तर के लोग भी बेनकाब हो जाएंगे तथा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के इस एक्शन से न सिर्फ प्रदेश की छवि पूरे देश में बनेगी बल्कि योग्य युवक-युवतियों का राजस्थान की भर्ती प्रक्रिया और भजनलाल सरकार के प्रति भरोसा और मजबूत होगा।
(09/07/2024)
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