इतने अधिक नम्बर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। सीबीएसई बरसों से जमकर नम्बर देता रहा है, अब इसी लाइन पर आरबीएसई यानी राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड भी चल पड़ा है। आज के तीस साल पहले 60 प्रतिशत यानी फर्स्ट डिवीजन लाने वाले बच्चे बच्ची को होशियार समझा जाता था। 50-55 वालों को भी कोई ज्यादा कमजोर नहीं समझता था। लेकिन अब तो 80-85 प्रतिशत वाले को भी ज्यादा होशियार नहीं समझा जाता है, क्योंकि एक बड़ी संख्या ऐसे बच्चे बच्चियों की है, जिनके नम्बर 90 प्रतिशत से ऊपर आ रहे हैं। काफी बच्चे ऐसे भी हैं जिनको 98-99 प्रतिशत नम्बर या पूरे के पूरे नम्बर दिए जा रहे हैं। मेरे ख्याल में यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
जरा सोचिए कि 100 में से 100 नम्बर लाना और इतने नम्बर देना यानी के पूरे के पूरे किसी के गले उतरने वाली बात है। मैथ्स, फिजिक्स और केमेस्ट्री ही नहीं बल्कि भाषाओं में भी पूरे नम्बर दिए जा रहे हैं। हिन्दी, संस्कृत, उर्दू और इंग्लिश साहित्य में भी पूरे नम्बर दिए जा रहे हैं। नम्बरों में इतना सरलीकरण नई पीढ़ी को बर्बाद कर देगा।
परिणाम वाले दिन परिजन और रिश्तेदार बच्चों की अंकतालिका का सोशल मीडिया पर स्टेटस लगाते हैं और फिर यह कमेंट पढ़कर या सुनकर हैरानी होती है कि आपका बच्चा तो कमजोर रहा है उसके 90 प्रतिशत भी नहीं आए, फलां के तो 95 प्रतिशत से अधिक आए हैं। ऐसा नहीं है कि यह ज्यादा नम्बर वाले बच्चे इंटेलिजेंट नहीं हैं, जरूर हैं। लेकिन 70-80 प्रतिशत वालों को कमजोर समझना भी बेवकूफी है।
मैं तो 60 प्रतिशत वाले को भी कमजोर नहीं समझता, उसके लिए अवसर की कोई कमी नहीं है। सरकारी नौकरी की हर परीक्षा में प्रतियोगिता है, वहां आप कैसी तैयारी करेंगे उस पर सब कुछ निर्भर है। 50-60 प्रतिशत से 10वीं 12वीं करने वाले कामयाब होते और 80 से ऊपर वाले फिसलते हुए हमने खूब देखे हैं। जिसकी वजह यह है कि ज्यादा नम्बरों के चक्कर में जो बच्चा अपने आपको होशियार की पूंछ समझ बैठता है वो आगे चलकर कमजोर और लापरवाह हो जाता है तथा जो बच्चा बोर्ड परीक्षाओं में कम नम्बर के चलते खुद को कमजोर की श्रेणी से निकालकर दिन रात तैयारी करता है वो सफलता की सीढ़ी चढ़ जाता है।
यहां एक और बात यह है कि जो कॉपी चैक करने वाले हैं या बच्चों को पढ़ाने वाले हैं, उन शिक्षकों के भी 90 प्रतिशत नम्बर नहीं आ सकते। तो फिर उनके पढ़ाए हुए बच्चों के 100 में से 100 कैसे आ जाते हैं ? समझ से परे है। बहुत से शिक्षकों और टॉपर बच्चों से बात होती है, तो उनकी नाॅलेज स्पष्ट इशारा करती है कि 90 प्रतिशत से ऊपर नम्बर देना इन बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
(23/05/2024)
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