न‌ई हिजरी साल या इस्लामिक साल की मुबारकबाद का क्या औचित्य है ?

न‌ई हिजरी साल या इस्लामिक साल की मुबारकबाद का क्या औचित्य है ?

*************************
जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। हमारे देश में 08 जुलाई 2024 ईस्वी को न‌ई हिजरी साल 1446 शुरू हुई है। अरब देशों में पहले दिन शुरू हो गई, क्योंकि यह चांद देखने यानी न‌ए चांद के निकलने से शुरू होती है, जो अरब देशों में पहले दिन दिख जाता है। इसे हिजरी साल के साथ इस्लामिक साल भी कहा जाता है। पिछले कुछ बरसों से इस साल की मुबारकबाद देने के सिलसिले ने जबरदस्त जोर पकड़ा है।

जिसकी एक वजह तो सोशल मीडिया है, दूसरी वजह जानकारी का अभाव है, तीसरी वजह जिस तरह से दूसरे मजहब के लोग अपनी नई साल की मुबारकबाद देते हैं तो हमें भी देनी चाहिए और चौथी वजह आखरी पैगम्बर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खानदान से बुग्ज (बैर/दुश्मनी) रखना है।

बहरहाल यह हर इन्सान की मर्जी है कि वो क्या करता है और क्या नहीं करता है। लेकिन कुछ काम सही होते हैं और कुछ गलत। सही काम करने से किसी को कोई एतराज़ नहीं होता है, लेकिन ग़लत काम करने पर हर कोई एतराज़ करता है। इसलिए कोई आदमी जो भी काम करता है तो उसके सही ग़लत की जानकारी लेना बहुत जरूरी होता है।

पहले बात करें हिजरी सन की शुरूआत पर, तो इसकी शुरूआत आखरी पैगम्बर हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हिजरत की याद में शुरू की गई थी। इसकी शुरूआत दूसरे खलीफा हज़रत उमर रजिअल्लाह अन्हु के दौरे ख़िलाफत में हुई थी। हिजरत (किसी परेशानी में जन्म भूमि त्याग देना या अपना खानदानी वतन छोड़ देना) का वाकिया मोटे तौर पर सभी को मालूम है कि पैगम्बर साहब को अपने पैदाइशी वतन मक्का में इतना परेशान किया गया कि अल्लाह के हुक्म पर उन्होंने मक्का छोड़ दिया और खामोशी से छुपकर मदीना आ ग‌ए, फिर बाकी पूरी ज़िन्दगी मदीना में ही रहे और वहीं दफ़न हैं।

हिजरत यानी सीधे तौर पर पैगम्बर साहब की परेशानी और वतन छोड़ने से जुड़ा शब्द है। हिजरी साल का पहला महीना मुहर्रम होता है। इस महीने में पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पूरे खानदान पर बेइंतेहा ज़ुल्म हुआ था और उनके लाडले नवासे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को पूरे खानदान और साथियों के साथ करबला के तपते मैदान में भूखा प्यासा शहीद कर दिया था। अत्याचारी बादशाह यजीद और उसकी आतंकवादी फौज ने यह ज़ुल्म किया था। इसलिए हिजरी सन की शुरुआत खुशी और मुबारकबाद से नहीं ज़ुल्म का मुकाबला करने के सबक के साथ पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और उनके खानदान पर हुए ज़ुल्म को याद करते हुए शुरू करनी चाहिए।

पैगम्बर हज़रत मुहम्मद साहब ने फ़रमाया है कि "जिसने हसन और हुसैन से मुहब्बत की उसने मुझ से मुहब्बत की और जिसने इनसे बैर रखा उसने मुझ से बैर रखा।" (इमाम हसन हज़रत इमाम हुसैन के बड़े भाई हैं, जिन्हें जालिमों ने जहर देकर शहीद कर दिया था)।

एक आसान सी बात कि अगर किसी का बाप दादा किसी आतंकी हमले में मारा जाए या किसी बहुत ही दर्दनाक पीड़ा के साथ अपना वतन छोड़ना पड़े या किसी के पूरे खानदान पर दर्दनाक ज़ुल्म करने के बाद उसको कत्ल कर दिया जाए तथा इस दिन की जब बरसी आए और कोई यह कहे कि "आपको यह बरसी मुबारक हो।" क्या कोई ऐसा कह सकता है ? जवाब होगा नहीं। अगर किसी ने अनजाने में कह भी दिया तो जरा सोचिए उस खानदान पर क्या गुजरेगी जो इस पीड़ा को भुगत चुका है ?
(08/07/2024)
(01 मुहर्रम 1446 हिजरी)
---------------------------------------------
➡️अगर आपको हमारा यह लेख/खबर पसंद आया हो, तो प्लीज इसे शेयर/फॉरवर्ड कीजिए और साथ ही हमारे अखबार की आर्थिक मदद भी कीजिए।
अकाउंट डिटेल्स:- इकरा पत्रिका
IKRA PATRIKA
IFSC:- PUNB 0613900
PNB, MUSLIM SR. SEC. SCHOOL, MOTI DUNGARI ROAD, JAIPUR.
-------------------------------------------
➡️इकरा पत्रिका को सहयोग राशि आप Paytm, Phone Pay और Google Pay से भी भेज सकते हैं। फोन नम्बर 9414361522 पर (अकाउंट Farooq Ali Khan)
--------------------------------------------
©️ Copyright :- इस सम्पूर्ण लेख/खबर को या इसके किसी पैराग्राफ़ को हुबहू या तोड़ मरोड़ कर प्रकाशित करना मना है। अलबत्ता आप चाहें तो लेखक और हमारे अखबार के नाम के साथ इस सम्पूर्ण लेख/खबर को सोशल मीडिया पर शेयर जरूर कर सकते हैं।
--------------------------------------------
-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।

©️ Copyright Thar News & Ikra Patrika.
All Rights Reserved.

Comments

  1. Aap ka yeh lekh aap ki bahut se maamlat mein kam ilmi ka namuna hai

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

झुंझुनूं में रीटा चौधरी को कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनाने पर जबरदस्त रोष

चित्तौड़गढ़ अन्जुमन स्कूल में किया मुस्लिम शिक्षकों का सम्मान

कुरैशी समाज की नो दहेज, नो गार्डन, नो डिनर मुहिम के तहत सादगी से हुई शादी