हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद क्या होगा ?
हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद क्या होगा ?
लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री के 400 पार के नारे की जनता ने हवा निकाल दी, बहुमत भी नहीं मिल पाया। खबर है कि मोदी और अमित शाह की रणनीति की भाजपा की उच्च लीडरशिप और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की लीडरशिप के बीच आलोचना हो रही है। भाजपा को बहुमत नहीं मिलने के पीछे इन दोनों की एकला चालो रे कि नीति को दोषी ठहराया जा रहा है। अब अगर हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा रिपीट हो जाती है और झारखंड में जीत जाती है तो मोदी और अमित शाह पर पार्टी व संघ की आंतरिक चर्चा में सवाल उठने बंद हो जाएंगे।
धरातल से जुड़े हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा बहुत कमजोर साबित हो रही है, अगर वोटों का ध्रुवीकरण नहीं हुआ तो यह दोनों राज्य भाजपा के हाथ से निकल सकते हैं। झारखंड में जरूर ऐसे हालात बन रहे हैं कि भाजपा वहां अपनी सरकार बना ले। अगर वो तीनों ही राज्यों में चुनाव हार गई तो मोदी और अमित शाह विरोधी भाजपा लीडरशिप और संघ परिवार में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा जोर पकड़ेगी।
यही हाल राहुल गांधी को लेकर भी होगा। अगर हरियाणा में कांग्रेस सरकार बनाने में सफल हो जाती है और महाराष्ट्र व झारखंड में इंडिया गठबंधन की सरकार बन जाती है, तो राहुल गांधी की लीडरशिप और निखरेगी तथा देश बड़ी उम्मीद से उनकी तरफ देखेगा। इंडिया गठबंधन मजबूत होगा और मोदी सरकार को गिराकर सरकार बनाने या मध्यावधि चुनाव कराने की जद्दोजहद शुरू होगी, जिसका लाभ राहुल गांधी को मिलना तय है। अगर उल्टा हुआ यानी इन राज्यों में कांग्रेस पार्टी और सहयोगी दलों का प्रदर्शन खराब रहा तो सहयोगी दल राहुल गांधी को निशाना बनाएंगे, इंडिया गठबंधन में तोड़ फोड़ शुरू हो जाएगी।
यही हाल विधानसभा उप चुनावों को लेकर भी होगा। जिन राज्यों में विधानसभा उप चुनाव होने जा रहे हैं उनमें सबसे महत्वपूर्ण यूपी और राजस्थान हैं। यूपी में 10 और राजस्थान में 6 सीटों पर विधानसभा उप चुनाव होने हैं। इन चुनावों को लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रतिष्ठा पूरी तरह दांव पर है, हालांकि उप चुनाव हारने के बाद भाजपा की राज्य सरकारों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि पहले से ही स्पष्ट पूर्ण बहुमत हासिल है।
यूपी की 10 सीटों में से 5 सपा की जीती हुई हैं, अगर इन चुनावों में भाजपा और सहयोगी दल सात आठ सीट जीत जाते हैं तो फिर योगी आदित्यनाथ की कुर्सी और मजबूत हो जाएगी, उन्हें हटाने कोशिश पानी पी जाएगी। अगर इन चुनावों में भाजपा को बड़ी सफलता नहीं मिली तो हार का ठीकरा योगी आदित्यनाथ के सिर पार्टी नेता फोड़ेंगे, क्योंकि इन चुनावों की पूरी कमान योगी आदित्यनाथ के हाथ में है। यही अखिलेश यादव के साथ होगा, अगर सपा अपनी सभी 5 सीटें जीत जाती है और एकाध सीट पर फतह का झंडा और फहरा लेती है तो यूपी में अखिलेश यादव की मजबूती तेजी से बढ़ेगी, अगर ऐसा नहीं होता है तो सपा कार्यकर्ताओं में मायूसी छा जाएगी।
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