स्कूलों में सूर्य नमस्कार को लेकर राजस्थान मुस्लिम फोरम ने व्यक्त किया कड़ा रोष
स्कूलों में सूर्य नमस्कार को लेकर राजस्थान मुस्लिम फोरम ने व्यक्त किया कड़ा रोष
उन्होने इसका विरोध किया कि राजस्थान सरकार के माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा समस्त माध्यमिक शिक्षा उपनिदेशकों तथा ज़िला शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वह सूर्य सप्तमी के अवसर पर यह सुनिश्चित करें कि सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में प्रार्थना सभा का समय 20 मिनट निर्धारित करके सूर्य नमस्कार करवाया जाए।
जमीअत उलमा-ए-हिन्द राजस्थान के उपाध्यक्ष हाफ़िज़ मन्ज़ूर अली ने कहा हिन्दू समाज में सूर्य को भगवान/देवता के रूप में पूजा जाता है जिसमें कई श्लोकों के उच्चारण के साथ प्रणामासन्न, अष्टांग नमस्कार आदि क्रियाओं को इबादत समझ कर किया जाता है और इस्लाम धर्म में एक ईश्वर की ही इबादत जायज़ है और अन्य किसी की पूजा अस्वीकार्य हैै। इसलिए हम सरकार के इस फ़ैसले का विरोध भी करते हैं और सरकार से अपील करते है कि वह उक्त आदेश को तुरन्त वापस ले।
एसडीपीआई राजस्थान के उपाध्यक्ष डॉक्टर शहाबुद्दीन खान ने कहा कि भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है जिसके हर नागरिक को विचार, विश्वास, आस्था और पूजा की स्वतंत्रता प्राप्त है और वह अपनी पसंद का धर्म अपनाने, उसकी पालना करने और उसका प्रचार करने के लिए स्वतंत्र है। संविधान की धारा 25, 26, 28 के अनुसार किसी भी सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान में किसी धर्म विशेष से सम्बंधित निर्देश नहीं दिए जा सकते और ना ही ऐसे संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को किसी धार्मिक कार्य में सम्मिलित होने पर बाध्य किया जा सकता है। सूर्य नमस्कार का उक्त आदेश एकेश्वरवाद में विश्वास करने वाले लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। अतः माध्यमिक शिक्षा निदेशालय का उपरोक्त आदेश पूर्ण रूप से संविधान द्वारा दिए गए मूल अधिकार का हनन है।
उन्होंने सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया कि केरल में बिजोय इमानुअल व अन्य बनाम केरल राज्य एवं अन्य में 11 अगस्त 1986 को एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि किसी को भी राष्ट्रगान या कोई भी गीत गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसी प्रकार, मध्य प्रदेश, बिहार और गोवा की सरकारों ने सूर्य नमस्कार एवं सरस्वती वंदना आदि को स्कूलों में अनिवार्य करने का प्रयास किया था जिस पर उन राज्यों के उच्च न्यायालयों ने रोक लगा दी थी। राजस्थान सरकार का यह क़दम भी इसी प्रकार का प्रयास है। हमारा मानना है कि राज्य सरकार के शिक्षा निदेशालय का यह आदेश पूर्ण रूप से संविधान विरोधी तथा राज्य के आपसी प्रेम एवं भाईचारे के वातावरण को नुक़सान पहुंचाने वाला है।हमारा यह भी मानना है कि इस आदेश को लागू किया गया तो बच्चों के कोमल मस्तिष्क पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और उनमें धार्मिक आधार पर विभाजन की भावना पनपेगी।
मन्सूरी तेली महापंचायत के महासचिव अब्दुल लतीफ़ आरको ने कहा कि हम व्यायाम या वर्जिश करने के विरोध में नहीं हैं लेकिन स्कूलों में विशेष धर्म संस्कृति को बढ़ावा देने का हम विरोध करते हैं। सूर्य नमस्कार एक विशेष धर्म संस्कृति से जुड़ा हुआ है जिसमें सूर्य की पूजा करने के लिए कई योग आसन किए जाते हैं। यह इस्लाम धर्म के सिद्धांतों के खि़लाफ़ है। स्कूलों में सभी धर्म समुदाय के बच्चे पढ़ते है, लेकिन सरकार एक विशेष धर्म संस्कृति को ही बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। यह भी ज्ञात रहे कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने पहले ही सूर्य नमस्कार को वैकल्पिक कर दिया था।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मुहम्मद नाज़िमुद्दीन ने कहा यह बात भी बहुत हास्यपद है कि राजस्थान सरकार शिक्षा में गुणवत्ता का रिकार्ड बनाने के बजाए सूर्य नमस्कार में विश्व रिकॉर्ड बनाने की होड़ में लगी है। अगर सरकार को रिकॉर्ड ही बनाना है तो शिक्षा के क्षेत्र में अव्वल रहने का रिकॉर्ड बनाए, स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने का रिकॉर्ड बनाए। आज भी राजस्थान के कई स्कूलों में पर्याप्त अध्यापक और अच्छी बिल्डिंग, पीने का साफ पानी, छात्र छात्राओं के लिए शौचालय, कक्षा में बैठने के लिए फर्नीचर जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। सरकार को शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए, ना कि धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर।

Comments
Post a Comment