इस बार भी हांसी में मनाया जाएगा "नवाब क़ायम खां डे"
इस बार भी हांसी में मनाया जाएगा "नवाब क़ायम खां डे"
नवाब क़ायम खां साहब दिल्ली सल्तनत में सुल्तान फिरोजशाह तुगलक साहब के वजीर और सेनापति रहे हैं एवं कायमखानी क़ौम के वे प्रथम पुरुष हैं। इन्हीं के नाम पर कायमखानी क़ौम की उत्पत्ति हुई तथा नवाब क़ायम खां साहब और इनके दो भाइयों (नवाब जैनुद्दीन खां साहब और नवाब जबरूद्दीन खां साहब) की औलाद को कायमखानी कहा जाता है। कायमखानी क़ौम ने हिसार, हांसी, फतेहाबाद, चरखी दादरी, नालनोल, झुंझुनूं, फतेहपुर, ढोसी, केड, बड़वासी, सतावनी (डीडवाना क्षेत्र) आदि रियासतों पर अलग अलग समय करीब 375 साल तक शासन किया था।
भारतीय सैन्य इतिहास में इस क़ौम का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा हुआ है। विभिन्न युद्धों एवं सैन्य ऑपरेशनों में बड़ी संख्या में कायमखानी वीर सैनिक देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए हैं। छह कायमखानी सैनिकों को वीर चक्र और तीन को शौर्य चक्र और कई सैनिकों को अन्य सैन्य अवार्ड से भारत सरकार ने सम्मानित किया है। इसी कायमखानी क़ौम के प्रथम पुरुष नवाब क़ायम खां साहब को हर साल 14 जून को उनके शहीद दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए बड़े ही अदबो एहतराम के साथ याद किया जाता है।
नवाब क़ायम खां साहब की पैदाइश 1335 ईस्वी में तत्कालीन ददरेवा (जिला चूरू) रियासत में कर्म सिंह नामक एक राजकुमार के तौर पर हुई थी। ददरेवा रियासत पर तब उनके पिताजी मोटेराव जी चौहान का शासन था। नवाब कायम खां साहब का मकबरा हांसी (हरियाणा) में कायमसर झील के किनारे स्थित है।
हांसी किसी जमाने में हिन्दुस्तान का रूहानी मरकज हुआ करता था, जहां खानकाह शेख जमालुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह है, जो आज दरगाह चार कुतुब साहब के नाम से पूरी दुनिया में मशहूर है। चौथे कुतुब साहब के हाथ पर नवाब क़ायम खां साहब और इनके दो भाइयों ने इस्लाम कुबूल किया था। यहां नवाब क़ायम खां साहब ने अपने शासनकाल में विशाल कायमसर झील बनवाई थी, जिसका बड़ा हिस्सा आज भी मौजूद है।
इसी झील के किनारे नवाब कायम खां साहब को दफन किया गया, जहां उनके बड़े साहबजादे और तत्कालीन हिसार-हांसी रियासत के द्वितीय कायमखानी शासक नवाब मोहम्मद खां साहब ने उनका मकबरा बनवाया था। नवाब मोहम्मद खां साहब का विशाल मकबरा दरगाह चार कुतुब परिसर के अन्दर स्थित है। नवाब मोहम्मद खां साहब तत्कालीन झुंझुनूं कायमखानी रियासत के स्वतंत्र संस्थापक शासक भी रहे हैं।
कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति के अध्यक्ष कप्तान फजरू खां ने बताया कि पिछले दो साल से हमारी समिति हांसी में नवाब कायम खां डे मनाती आ रही है, 14 जून 2023 को हमारी समिति ने पहली बार हांसी में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया था। कायमखानी रियासतों के खात्मे के करीब 280 साल बाद हांसी में पहली बार कायमखानी क़ौम का इतना बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ था। इस बार भी हमारी समिति हांसी में कार्यक्रम आयोजित कर रही है। 14 जून 2025 को यह कार्यक्रम सुबह 8 बजे इन्शाअल्लाह आयोजित होगा। जिसमें नवाब क़ायम खां साहब के मकबरे, उनके साहबजादे नवाब मोहम्मद खां साहब के मकबरे और उनके पीरो मुर्शीद खानकाह चार कुतुब में चारों कुतुब साहब की मजार पर चादर पेश की जाएगी और मुल्क व क़ौम के लिए दुआ की जाएगी।
कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति की "हांसी प्रोजेक्ट सब कमेटी" के चेयरमैन खुर्शीद खां रतनगढ़ ने बताया कि नवाब क़ायम खां साहब का मकबरा पूरी तरह से जर्जर हो चुका है, इसका 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सा गिर चुका है। हम हांसी प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से इसका पुनर्निर्माण करवाने के प्रयास में लगे हुए हैं। 2023 में हमारी समिति ने यहां चादर पेश कर कुतबा पत्थर लगाया था। इसकी साफ सफाई और देखभाल भी यहां के स्थानीय गैर मुस्लिम भाई बहन ही कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में स्थानीय लोगों का विशेष सहयोग रहता है। इस बार के कार्यक्रम में भी फातिहाख्वानी होगी और मुल्क व क़ौम की तरक्की व भाईचारे के लिए दुआ की जाएगी।
हांसी के अलावा कायमखानी बाहुल्य कई शहरों व गांवों में भी नवाब कायम खां डे हमेशा की तरह मनाया जाएगा। इनमें ददरेवा, जयपुर, अजमेर, सीकर, झुंझुनूं, चूरू, भादरा, चित्तौड़गढ़ आदि में आयोजित कार्यक्रम प्रमुख कार्यक्रम होंगे। ददरेवा में राजस्थान कायमखानी महासभा नवाब कायम खां साहब की जन्मस्थली में स्थापित नवाब कायम खां मेमोरियल शहीद स्मारक में कार्यक्रम आयोजित करेगी।


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