विधायक रफीक खान : कांग्रेस में तेजी से उभरता और जमीन से जुड़ा हुआ एक शख्स

विधायक रफीक खान : कांग्रेस में तेजी से उभरता और जमीन से जुड़ा हुआ एक शख्स

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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। आज के दौर में हर राजनीतिक दल में अमूमन वही नेता तेजी से आगे बढ़ता है या उसे आगे बढ़ाया जाता है, जिसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीतिक हो। यानी उसके दादा, पिता या भाई विधायक या सांसद रहे हों या पार्टी संगठन में बड़े पद पर रहे हों। ऐसे नेता बहुत कम मिलेंगे, जो खुद की योग्यता और खुद के धरातल से जुड़ाव की बुनियाद पर अपनी पार्टी में बड़ा स्थान बना लें। जो मिलेंगे वे गिनती के मिलेंगे, चाहे वे किसी भी पार्टी में हों।



जहां तक बात राजस्थान की करें, बात कांग्रेस पार्टी की करें या मुस्लिम समुदाय की करें, तो एक ही चेहरा और नाम सबको नजर आएगा, जिसका नाम रफीक खान है। यह कोई प्रशंसा के शब्द नहीं हैं, बल्कि यह हकीकत है। रफीक खान राजस्थान कांग्रेस का एक ऐसा चेहरा है, जो तेजी से उभरकर सामने आया है। इस लेख को आप आखिर तक पढ़ेंगे तो जो जुमले भूमिका में लिखे गए हैं, वे आपको सौ प्रतिशत सत्य लगेंगे।


रफीक खान वर्तमान में जयपुर शहर लोकसभा क्षेत्र की आदर्श नगर विधानसभा सीट से विधायक हैं तथा राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक हैं। वे दूसरी बार विधायक बने हैं। वे राजस्थान राज्य अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन भी रहे हैं। उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि में कोई भी शख्स राजनीतिक मैदान में नहीं रहा। उनके पिता छोटू खां जी एक बिजनेसमैन और कवि थे तथा सादगी और शालीनता से जीवन यापन करने वाले शख्स थे, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं।



सबसे पहले चार पांच जुमले उनके वालिद साहब के लिए खिराज ए अकीदत पेश करते हुए, जिन्हें आप पढ़ेंगे तो ताज्जुब करेंगे। बेटे यानी रफीक खान ने 2018 का पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और छोटू खां जी पूरी तरह से स्वस्थ होते हुए भी कहीं भी बेटे के लिए वोट मांगने नहीं गए, जबकि शहर में उनका अच्छा खासा रसूख था, किसी से नहीं कहा कि रफीक को वोट देना, बस अपने घर पर खुदा से ताल्लुक में ही मग्न रहे। जो कुछ कहना या मांगना था खुदा से ही कहा और मांगा। जिसका परिणाम भी सामने था, जो नया नवेला शख्स जयपुर के प्रकांड सियासी पंडितों के बीच पहली बार मैदान में उतरा, जिसका राजनीति से दूर दूर तक का वास्ता नहीं रहा, उसने भाजपा के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी को चुनाव हरा दिया।


रफीक खान का जन्म 24 फ़रवरी 1966 ईस्वी को हुआ था। आदर्श नगर विधानसभा सीट वैसे तो मुस्लिम बाहुल्य मानी जाती है, लेकिन रफीक खान से पहले यहां से कोई मुस्लिम विधायक नहीं रहा। यहां से 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के अशोक परनामी विधायक चुने गए थे। परिसीमन से पहले इसका बड़ा हिस्सा जौहरी बाजार विधानसभा क्षेत्र में आता था, अब इस नाम से कोई सीट नहीं है। जौहरी बाजार विधानसभा सीट से जरूर मुस्लिम विधायक रहे थे।


मुझे 18 फरवरी 2018 का वो दिन आज भी याद है, जब हम (मैं, फिरोज भाईसाहब, सिकन्दर भाईसाहब नियाज़ी और रफीक साहब) रफीक साहब के घर बैठे चाय की चुस्की के साथ सियासी चर्चा कर रहे थे। रफीक साहब ने मुझसे पूछा आदर्श नगर से कौन कौन दावेदार हैं ? मैंने कांग्रेस और भाजपा से जो भी मुख्य दावेदार थे, जिनकी चर्चा सियासी गलियारों में होती थी, उन सबके नाम बता दिए। उन्होंने पूछा और ? मैंने कहा और तो कोई नजर नहीं आता, तो उन्होंने तपाक से कहा कि एक तो मैं आपके सामने ही बैठा हूं। हम चौंक गए, मैंने कहा मजाक कर रहे हो या सच में दावेदार बनोगे ? तो उन्होंने बड़े ही कॉन्फिडेंस से कहा कि दावेदार भी हूं, कांग्रेस की टिकट भी लेकर आऊंगा और चुनाव भी जीतूंगा।


मैंने कहा फिर तो मुबारक हो, खबर लगा दें ? उन्होंने कहा, जी आप खबर लगा दीजिए। मैंने उनकी दावेदारी की खबर ज्यों ही लगाई, तो जो दावेदार थे वे पूछने लग गए कि यार यह नया दावेदार कहां से लाए हो, उन्हें पूछा भी है क्या ? मैंने कहा, पूछा भी है और बंदे ने विधायक बनने का दावा भी किया है। यह पहली खबर थी इक़रा पत्रिका में रफीक भाई की दावेदारी की। जुलाई तक तो बात सबको मजाक सी लग रही थी, लेकिन अगस्त में उनके नाम का डंका बजने लग गया, पुराने दावेदार अचानक पिछड़ने लग गए और नवम्बर में जब टिकट घोषित हुई तो रफीक खान को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया, शहर के तमाम सियासी मठाधीश इस घोषणा से चौंक गए।



हफ्ते दस दिन का चुनाव था, नया नवेला उम्मीदवार, शहरी सीट। सामने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मजबूत व अनुभवी सिपहसालार और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी। परनामी जी को भी जीत का पूरा कॉन्फिडेंस था, कॉन्फिडेंस भी क्यों नहीं हो, वे एक मंजे हुए राजनेता और परम्परागत भाजपा सीट तथा सामने बिना राजनीतिक पृष्ठभूमि का नया नवेला मुस्लिम कांग्रेसी उम्मीदवार। जब परनामी जी से पत्रकारों ने पूछा कि आपके सामने कांग्रेस ने रफीक खान को टिकट है ? तो उन्होंने तुरंत कहा कौन रफीक ? यानी बहुत हल्के में लिया।


तब रफीक खान को कोई भाषण भी तगड़ा नहीं देना आता था, प्रचार के दिन भी बहुत कम थे, लेकिन गली गली घूमकर अपने मजबूत कॉन्फिडेंस और जो कुछ साथी थे उनके बलबूते पर हर वोटर को टटोला, उनको भरोसा दिलाया और कहा कि आप मुझे चुनाव जीता दीजिए, याद रखोगे कि कोई ऐसा शख्स विधायक बनकर आपके बीच आएगा, जो दिन रात आपके बीच रहेगा और कभी आपको शिकायत का मौका नहीं देगा। 


लोगों ने उनके मासूम चेहरे और बिना लाग लपेट की बातों पर भरोसा किया। 7 दिसम्बर को मतदान हुआ, लोगों में मतदान के लिए ऐसा जोश जुनून आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र में पहले कभी नहीं देखा गया। 11 दिसम्बर को मतगणना हुई और रफीक खान विधायक बन गए। परिणाम घोषित होने के बाद जब पत्रकारों ने रफीक खान से पूछा परनामी जी ने आपको टिकट मिली तब कहा था, कौन रफीक ? तो अब आप क्या कहेंगे ? रफीक खान ने तपाक से कहा अब परनामी जी जान गए होंगे कि रफीक कौन है ?


किस्मत के धनी, शालीन, मिलनसार, सबकी आवभगत करने वाले, हर वक्त लोगों के बीच रहने वाले एक ऐसे विधायक के लिए यह शब्द लिखे जा रहे हैं, जो सुबह जल्दी उठकर लोगों की समस्या सुनने लग जाता है और फिर देर रात तक समस्या सुनता रहता है और जितना हो सके समाधान करने की कोशिश करता है। रात दो बजे तक फोन आते रहते हैं खासतौर पर एसएमएस अस्पताल में मरीजों को लेकर और वो सम्बंधित मरीज की डिटेल डॉक्टर के पास भेजते रहते हैं, डॉक्टर से बात भी करते हैं और अदब से रिक्वेस्ट भी करते हैं, कभी किसी डॉक्टर या अन्य मेडिकल कर्मी को कभी ऊंची आवाज में बात नहीं करते, यह सब बातें मैं आंखों से देखे हुई और उनके पास बैठकर कानों से सुनी हुई लिख रहा हूं।


2018 के विधानसभा चुनाव में रफीक खान को 88 हजार 541 वोट मिले, 50.78 प्रतिशत। अशोक परनामी को 75 हजार 988 वोट मिले, जीत का अन्तर 12 हजार 553 रहा। सरकार कांग्रेस की बनी, अशोक गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। रफीक खान ने जमकर काम किया, किसी को शिकायत का मौका नहीं दिया। जिस नए नेता को चुनाव प्रचार में तगड़ा भाषण नहीं देना आता था, वो चंद महीनों में ही भाषण शैली में तेजी आगे बढ़ा, काम की वजह से राजधानी की पोलिटिक्स में पूरी तरह से दबदबा बन गया, विधानसभा में जनता के मुद्दे जिस अंदाज में उठाता, तो सब देखते रहते कि पहली बार विधायक बना शख्स ऐसे कैसे बोलने में माहिर हो सकता है ? लेकिन यह सब उनकी दिल की आवाज थी, जनता से किए वादों की आवाज थी, जनता के प्रति जवाबदेही की आवाज थी, जनता को हो रही पीड़ा की आवाज थी।


मुख्यमंत्री गहलोत ने उन्हें अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बना दिया। 2023 का चुनाव आया तो पार्टी ने उन्हें फिर मैदान में उतारा और इस बार एक लाख 3 हजार 421 रिकॉर्ड वोट लेकर वे दूसरी बार विधायक बने, 52.18 प्रतिशत वोट मिला। सामने भाजपा से रवि नैय्यर मैदान में थे, जिन्हें 89 हजार 348 वोट मिले। जीत का अन्तर 14 हजार 73 वोट रहा। आदर्श नगर मुस्लिम बाहुल्य सीट है, तो परम्परागत कांग्रेसी वोटर होने के नाते मुस्लिम वोट दोनों चुनाव में एकतरफा रफीक खान को पड़े, लेकिन इन वोटों को जीत की चौखट पर पहुंचाया गैर मुस्लिम वोटर ने। 


दोनों चुनावों में हिन्दू मुस्लिम ध्रुवीकरण का प्रयास, जयपुर शहर परम्परागत रूप से भाजपा का गढ़, आदर्श नगर से लगातार भाजपा की जीत। इन सबके बावजूद रफीक खान को अच्छी खासी संख्या में गैर मुस्लिम वोट मिले, जिनके बारे में पहले चुनाव में तो यह कहा जा सकता है कि जो वोटर परनामी से नाराज़ थे वे जमकर रफीक खान को पड़े। लेकिन दूसरे चुनाव में उनके काम की वजह से बढ़कर वोट मिले। लोगों को आसानी से उपलब्ध होने वाला एक ऐसा शालीन और सभ्य विधायक मिल गया, जिसके पास कोई भी आए उसकी समस्या को सुनकर समाधान करने का प्रयास करे, इससे ज्यादा वोटर को चाहिए भी क्या ?


रफीक खान की कार्यशैली, विधानसभा में भागीदारी, स्पष्टवादिता, जनता से जुड़ाव, कांग्रेस पार्टी की नीतियों के प्रति समर्पित भाव और पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी से दूर रहकर सबके लिए काम करने की सोच के कारण पार्टी ने दूसरी बार जीतने के बाद उन्हें विधानसभा में कांग्रेस का मुख्य सचेतक बनाया। सम्भवतः किसी मुस्लिम विधायक को पहली बार कांग्रेस ने राजस्थान में मुख्य सचेतक बनाया है। उनके काम करने के तरीके और शालीनता से विधानसभा में जनहित की बात कहने की प्रशंसा न सिर्फ आम आदमी, राजनीतिक विश्लेषक और कांग्रेस पार्टी के नेता करते हैं, बल्कि सत्ताधारी भाजपा के नेता भी आपसी चर्चा में रफीक खान की प्रशंसा करते हैं। 


रफीक खान द्वारा सबके काम करने और सामने वाले से शालीनता से पेश आने का जीता जागता सबूत मार्च 2025 में सामने आया। जब विधानसभा में चर्चा के दौरान उन्हें भाजपा विधायक गोपाल शर्मा ने "पाकिस्तानी-पाकिस्तानी" कह कर अभद्रता की। रफीक खान भावुक हो गए, विधानसभा के बाहर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि "मैंने इस बारे में स्पीकर साहब से भी बात की है, लेकिन इस मामले पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मैं आज बहुत पीड़ित महसूस कर रहा हूं।" 


"मैंने आज विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि आप ऑफलाइन (सदन के बाहर) के मुद्दों पर चर्चा करते हो, लेकिन इस मुद्दे पर भी बात होनी चाहिए, जयपुर के विधायक ने जिस तरह से मेरे व्यक्तित्व का चीर हरण किया, दो साल पहले मेरे वालिद गुज़र गए, लेकिन मैं खुश हूं, क्योंकि आज वो ज़िंदा होते तो उन्हें यह देख कर बहुत दुःख होता, इतनी गालियां मुझे पड़तीं, तो शायद वो बर्दाश्त नहीं कर पाते।''


उन्होंने आगे कहा कि "मुझे दो रात से नींद नहीं आई है। मैं तकलीफ में हूं, क्या मुसलमान विधायक होना अपराध है ? और अगर मुसलमान विधायक होना अपराध है, और इसी तरह भाषा की दरिद्रता रही, तो मैं भारतीय जनता पार्टी के लोगों से कहना चाहता हूं, एक क़ानून लाया जाए और यह तय कर दिया जाए कि आज से इस विधानसभा में कोई मुस्लिम विधायक चुन कर नहीं आएगा।"


रफीक खान का यह भावुक मीडिया सम्बोधन बहुत ही तेजी से वायरल हुआ। कांग्रेस नेताओं और यहां तक कि भाजपा नेताओं ने भी उनके साथ सहानुभूति दिखाते हुए गोपाल शर्मा की टिप्पणी को ग़लत कहा, जनता में जबरदस्त रोष उत्पन्न हुआ। विधानसभा में गोपाल शर्मा द्वारा खेद प्रकट किया गया। 


ऐसा ही एक और प्रकरण भी इसके बाद हुआ। हवा महल भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य द्वारा आए दिन राजधानी का माहौल खराब करने और साम्प्रदायिक बयानबाजी करने को लेकर हुआ। जब जयपुर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के आगे बालमुकुंद आचार्य ने मस्जिद का अपमान किया, तो रफीक खान ने इसी मस्जिद में प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पत्रकारों से खचाखच भरी मस्जिद में जमकर बालमुकुंद आचार्य की खिंचाई की, कठोर शब्दों में चेतावनी दी। रफीक खान को पहली बार लोगों ने इतने गुस्से में देखा। जिस अंदाज में उन्होंने बालमुकुंद आचार्य की खिंचाई की, उसकी चारों ओर प्रशंसा की गई। साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के मामले में ऐसी खिंचाई प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आज तक किसी भी मुस्लिम नेता ने राजस्थान में नहीं की है।


सियासी चाय चौपालों पर जो चर्चा होती है या राजनीति के उच्च गलियारों में जो चर्चा होती है, उसमें कहा जाता है कि राजस्थान में रफीक खान के रूप में कांग्रेस को एक बड़ा नेता मिल गया है। जो अपनी कार्यशैली, शालीनता, बात करने के अंदाज और पार्टी के प्रति समर्पित भाव के कारण तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह भी चर्चा होती है कि रफीक खान बिना किसी भेदभाव न सिर्फ आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र के लोगों की बल्कि अन्य विधानसभा क्षेत्रों के लोगों यानी पूरे राजस्थान के लोगों की समस्या को गौर से सुनता है और उनका समाधान करने का हर संभव प्रयास करता है। कभी किसी काम के लिए मना नहीं करता, हर छोटे बड़े सामाजिक कार्यक्रम और दुख सुख की घड़ी में वो जनता के बीच हमेशा खड़ा रहता है।

(10/08/2025)

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