आधुनिक शहर व गांव निर्माताओं, उनके दलालों और अवैध बिल्डिंग निर्माताओं ने किया शहरों व गांवों को बर्बाद
आधुनिक शहर व गांव निर्माताओं, उनके दलालों और अवैध बिल्डिंग निर्माताओं ने किया शहरों व गांवों को बर्बाद
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। बारिश में हर शहर, कस्बे और गांव का बुरा हाल होता है। इस बार ही नहीं ऐसा हर साल होता है। सवाल यह है कि ऐसा क्यों होता है ? आज अत्याधुनिक तकनीक है, मशीनें हैं, एक से बढ़कर एक विद्वान शहर निर्माता (इंजीनियर, अफसर और नगरीय निकाय के पदाधिकारी) हैं। फिर हर शहर और कस्बे में मामूली बारिश में भी पानी भर जाता है, सीवरेज सड़कों पर बहने लग जाता है, गलियों और नालियों में गंदा पानी उफान मारने लग जाता है। अगर बारिश ज्यादा हो जाए तो फिर ऐसी शामत आ जाती है कि घरों से निकलना दुश्वार हो जाता है।
शहरों और कस्बों का ही नहीं अब तो गांवों का भी बुरा हाल है। पानी निकासी के स्थानों (जोहड़, तालाब आदि) पर अवैध कॉलोनियां बस जाती हैं, इन कब्जेधारियों की कितनी भी कोई शिकायत करे, कोई सुनने वाला नहीं है, क्योंकि चोर चोर मौसेरे भाई होते हैं। साथ ही ग्रामीण गौरव पथ योजना ने तो गांवों के चौक चौराहों को उजाड़ दिया है, उल्टी सीधी और ऊंची नीची गलियों की सड़कों एवं नालियों ने हर गांव के चौक को तालाब बना दिया है।
यह सब कारस्तानी आधुनिक शहर और गांव निर्माताओं की है। चोर बाजारी के इस पूरे खेल में सम्बन्धित विभाग के मंत्री, अफसर, इंजीनियर, नगरीय निकाय और पंचायती राज के पदाधिकारी (मेयर, सभापति, चैयरमेन, पार्षद, जिला प्रमुख, प्रधान, सरपंच, वार्ड पंच आदि) शामिल रहते हैं। सबका हिस्सा तय होता है, जिसका ईमानदारी से बंटवारा होता है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर जिसे आधुनिक शहरी विकास के नाम पर पूरे विश्व में जाना जाता है, करीब तीन सौ साल पहले इस शहर को बहुत ही खूबसूरत अंदाज में बसाया गया था, जब आज जैसी तकनीक और मशीनरी नहीं थी। अब इस शहर की सड़कों और बाहरी कॉलोनियों का आधुनिक शहर निर्माताओं ने कूड़ा कर कर दिया है। यही हाल राजस्थान के दूसरे शहरों और कस्बों का है।
इन शहरों और कस्बों में विकास के नाम पर नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों, नगर निकाय पदाधिकारियों, पार्षदों और उनके दलालों ने जो चांदी कूटी है, वो बेहिसाब है। इन महानुभावों ने जगह जगह अवैध बिल्डिंग बनवाकर बिल्डरों के साथ खुद की पांचों अंगुलियां घी में डूबो ली और जनता को बारिश में खून के आंसू रोने पर मजबूर कर दिया। सड़कों और गलियों में अतिक्रमण तो कोढ़ में खाज वाली कहावत चरितार्थ कर रहा है।
समस्या विकराल है, जनता बेहाल है। समाधान करने वालों को समस्या से कोई मतलब नहीं है, क्योंकि यह समस्या खुद उन्होंने ही अवैध माल बटोरने के लिए पैदा की है। इसलिए परेशान जनता को खुद अपनी समस्या का समाधान करना चाहिए। लोकतांत्रिक तरीके से इस लूटमार का विरोध करना चाहिए। अपने अपने शहरों, कस्बों और गांवों को बचाने के लिए, पानी निकासी की पुख्ता व्यवस्था कराने के लिए जद्दोजहद करनी चाहिए।
आने वाले नगर निकाय और पंचायती राज चुनावों में वर्तमान चोर पदाधिकारियों (मेयर, सभापति, चैयरमेन, पार्षद, जिला प्रमुख, प्रधान, सरपंच, वार्ड पंच आदि की शक्ल में जो भी हों) चुनावी मैदान में आएं तो उन्हें खरी खोटी सुनाकर ऐसी करारी हार दें कि वो हमेशा के लिए याद रखें। आपकी इस जद्दोजहद से नए उम्मीदवार भी डरे रहेंगे, उनसे पुख्ता वादा लें और अगर जीत के बाद वे भी लूटमार करने लग जाएं तो उनके खिलाफ शुरू से ही आवाज बुलंद करें। जब तक आप खुद जद्दोजहद नहीं करोगे, तब तक हर शहर, कस्बे और गांव का यही हाल रहेगा।
(09/09/2025)
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