जयपुर में मनाया 208 वां "सर सय्यद डे"
जयपुर में मनाया 208 वां "सर सय्यद डे"
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बानी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी सर सय्यद अहमद खां साहब को खिराज ए अकीदत पेश करने के बाद उनके मिशन को आगे बढ़ाने का किया अहद
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एएमयू ओल्ड बॉयज़ एसोसिएशन हर साल 17 अक्टूबर को करती है यह आयोजन
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एसोसिएशन के चेयरमैन और एएमयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डॉक्टर आज़म बेग, एसोसिएशन के वाइस चेयरमैन डॉक्टर नासिर खान और एएमयू के पूर्व छात्र डीआईजी अरशद अली ने विस्तार से इस दौर की चुनौतियों के बारे में बताते हुए सर सय्यद के मिशन को मजबूती से पकड़ कर उस पर चलने की गुजारिश की।
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। पूरी दुनिया में मशहूरो मारूफ यूनिवर्सिटी जिसके बानी (संस्थापक) ने इसके लिए हर क़िस्म का जुल्म बर्दाश्त किया, अपमान सहा, दर दर की ठोकरें खाई, सिर्फ इसलिए कि वो एक लाजवाब तालीमी इदारा बना सकें, जहां बिना किसी भेदभाव के हर क़िस्म की तालीम दी जाए, वो भी गुणवत्तापूर्ण तथा इस तालीम से एक ऐसी नस्ल तैयार की जाए, जो न सिर्फ खुद को, अपने खानदान को बल्कि मुल्क और पूरी दुनिया को रोशन करे।
इस यूनिवर्सिटी का नाम है अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश-भारत)। इस यूनिवर्सिटी की स्थापना करने वाली अज़ीम शख्सियत सर सय्यद अहमद खां साहब जिनकी पैदाइश के दिन (17 अक्टूबर) को हर साल पूरी दुनिया में "सर सय्यद डे" के नाम से याद किया जाता है। इस दिन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र और सर सय्यद अहमद खां साहब के मिशन से मुहब्बत करने वाले लोग दुनिया के कोने कोने में सर सय्यद डे मनाते हैं।
इस दिन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में इतना बड़ा प्रोग्राम आयोजित किया जाता है, जो बेमिसाल होता है। हजारों छात्र, पूर्व छात्र और एएमयू के वर्तमान व पूर्व शिक्षक इस दिन सर सय्यद अहमद खां साहब को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के विशाल और ऐतिहासिक कैम्पस में एक बेमिसाल खिराज ए अकीदत पेश करते हैं।
इस दिन राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी अपने रिवायती अंदाज में सर सय्यद डे मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 17 अक्टूबर 1995 में हुई थी। यह आयोजन हर साल राजस्थान की एएमयू ओल्ड बॉयज़ एसोसिएशन करती है। इस बार भी 17 अक्टूबर 2025 को जयपुर के टोंक फाटक पर स्थित होटल इंडियाना प्राइड में यह आयोजन किया गया, यानी पिछले 30 साल से जयपुर में लगातार सर सय्यद डे मनाया जा रहा है।
17 अक्टूबर 1995 को जब जयपुर में एएमयू ओल्ड बॉयज़ एसोसिएशन की बुनियाद रखी गई और सर सय्यद डे मनाया गया। उसे याद करते हुए एसोसिएशन के वर्तमान चेयरमैन और एएमयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष डॉक्टर आज़म बेग ने बताया कि वो एक ऐतिहासिक दिन था, उस दिन एसोसिएशन का चेयरमैन चौधरी तैय्यब साहब को बनाया गया, जो खुद अलीगेरियन (एएमयू से पढ़े हुए) थे, वे तीन राज्यों पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में विधायक व मंत्री रहे हैं। राजस्थान में कामां से विधायक रहे हैं, वहां से उनकी बेटी जाहिदा खान भी विधायक रही हैं।
इनके अलावा चौधरी अब्दुर्रहमान साहब भी उस प्रोग्राम की बुनियाद थे, वे भी अलीगेरियन थे और मकराना से विधायक व मंत्री रहे हैं। आईएएस जे एम खान साहब भी उस कार्यक्रम में शामिल थे, जो आरपीएससी के चेयरमैन भी रहे हैं। आज यह तीनों ही शख्स इस दुनिया में नहीं हैं। इन तीनों हस्तियों ने हमारी एसोसिएशन को मजबूत किया और सर सय्यद साहब के मिशन को आगे बढ़ाया।
उन्होंने बताया कि 17 अक्टूबर 1995 के सर सय्यद डे कार्यक्रम में एफ के शेरवानी साहब भी शरीक थे, जो इस बार के प्रोग्राम में भी शरीक हुए और उम्र के इस पड़ाव में मंच पर आकर उन्होंने तराना ए अलीगढ़ (एएमयू का गाना) गाया। खुदा उनकी सरपरस्ती हमारे ऊपर कायम रखे। उस शुरूआती प्रोग्राम में मैं (डॉक्टर आज़म बेग), डॉक्टर नासिर खान, यूनुस खान (पूर्व मंत्री व डीडवाना विधायक) आदि युवाओं के तौर पर शरीक हुए थे। यह हम सबकी कोशिश और इन बुजुर्गों की दुआएं और सरपरस्ती थी कि हम लगातार 30 साल से जयपुर में सर सय्यद डे मना रहे हैं।
इस बार के प्रोग्राम में मुख्य अतिथि के तौर पर डीआईजी अरशद अली (डीआईजी लॉ एंड ऑर्डर राजस्थान) शरीक रहे, जो खुद अलीगेरियन हैं। प्रोग्राम में सभी का इस्तकबाल डॉक्टर आज़म बेग, डॉक्टर नासिर खान और एसोसिएशन के सेक्रेटरी डॉक्टर शौकत अली ने किया। अपने इस्तकबालिया ख़ुतबे (स्वागत भाषण) में डॉक्टर आज़म बेग ने बहुत ही उम्दा अंदाज में और सबक आमोज बातें कहते हुए सर सय्यद अहमद खां साहब के मिशन की वजहात की।
उन्होंने कहा कि आज करीब 55 मुल्कों में सैकड़ों जगह सर सय्यद डे मनाया जा रहा है, जो हर साल मनाया जाता है, इस तरह दुनिया में किसी भी यूनिवर्सिटी के बानी को याद नहीं किया जाता है। यह सर सय्यद अहमद खां साहब के मिशन का सबसे बड़ा जीता-जागता सबूत है।
उन्होंने कहा कि विपरीत माहौल को अवसरों में बदलना, आपसी सहिष्णुता और सम्बन्धों को बढ़ावा देना, शिक्षा और अध्यापन को प्रगति की सीढ़ी मानना, यह सर सय्यद अहमद खां साहब की शिक्षाओं के मार्गदर्शक सिद्धांत हैं, जो आज भी उतने ही प्रभावी और असरदार हैं, जितने सौ वर्ष पहले थे। उन्होंने सर सय्यद अहमद खां साहब के मार्गदर्शक सिद्धांतों को आज भी पूरी कौम के लिए एक प्रकाशस्तंभ बताया। यह वे सिद्धांत हैं, जिन्होंने सर सय्यद अहमद खां साहब के दौर में प्रगति और सफलता का रास्ता दिखाया था।
डीआईजी अरशद अली ने कहा कि लगातार असफलता का रोना रोना, दूसरों को दोष देना और राजनीतिक उलझनों में फंसकर अपने उद्देश्यों को भूल जाना जीवित राष्ट्रों और जिंदा कौमों की पहचान नहीं है। उन्होंने कहा कि सफल राष्ट्र और कामयाब कौमें वे होते हैं जो अपनी कमजोरियों को स्वीकार करके उन पर काबू पाते हैं, न कि दूसरों को दोष देते हैं। उन्होंने कहा कि असफलता की शिकायत करना और सारी जिम्मेदारी दूसरों पर डाल देना पराजित मानसिकता की निशानी है।
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि, विद्वान, सामाजिक प्रतिनिधि और अलीग बिरादरी के सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। वक्ताओं ने आधुनिक शिक्षा में सर सय्यद अहमद खां साहब की अमूल्य सेवाओं और ज्ञान के माध्यम से प्रगति के उनके दृष्टिकोण को याद किया और ज़ोर दिया कि उनकी शिक्षाएं आज के दौर में भी उतनी ही मार्गदर्शक और महत्वपूर्ण हैं।
इस मौके पर सभी अतिथियों का स्वागत मोमेंटो और पुष्पमालाओं से किया गया। विशेष रूप से शिक्षा, समाजशास्त्र और पत्रकारिता में योगदान के लिए राजस्थान पत्रिका के संवाददाता अब्दुल बारी, सुश्री समरा सुल्ताना, अबरार त्यागी, डॉक्टर इस्माईल, सुश्री सारा खान और थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका के सम्पादक फारूक खान को सम्मानित किया गया। यूनानी चिकित्सा के प्रचार-प्रसार के लिए डॉक्टर शौकत अली, डॉक्टर मक़बूल, डॉक्टर फरहत, डॉक्टर सिराज तथा टोंक से आए डॉक्टर सरफ़राज और डॉक्टर अय्यूब को भी प्रतिष्ठित मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।
प्रोग्राम को रिटायर्ड आरएएस अधिकारी एआर पठान, एएमयू ओल्ड बॉयज़ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉक्टर नासिर खान, सचिव डॉक्टर शौकत अली, पूर्व अध्यक्ष एफ के शेरवानी, एमएनआईटी के प्रोफेसर मुश्ताक अहमद, राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आई यू खान और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य सुश्री समराह सुल्ताना ने भी संबोधित किया।
पत्रकार डॉक्टर इस्माईल और उनकी बेटी सारा ने शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए व्यक्तिगत तौर पर डॉक्टर आज़म बेग और उनके पूरे परिवार को सम्मानित किया। गौरतलब है कि डॉक्टर आज़म बेग डेढ़ दर्जन से ज्यादा कॉलेजों और स्कूलों का संचालन कर रहे हैं, जहां हजारों बच्चे बच्चियां तालीम हासिल कर रहे हैं।
आखिर में डॉक्टर शौकत अली ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम का समापन एक आत्मीय तराने के साथ हुआ, जिसे तराना ए अलीगढ़ कहा जाता है। प्रोग्राम में इस बात का अहद लिया गया कि हम हर हाल में सर सय्यद अहमद खां साहब के मिशन को आगे बढ़ाएंगे। इसमें यह भी वादा किया गया कि अलीगढ़ के सभी पूर्व छात्रों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम आयोजित कर, पूरी अलीग बिरादरी को जयपुर आमंत्रित कर एक भव्य सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
(24/10/2025)
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