पूर्व विधायक भंवरू खां : एक ऐसा शख़्स जिसने सियासत में सादगी व भाईचारे की मिसाल कायम की

पूर्व विधायक भंवरू खां : एक ऐसा शख़्स जिसने सियासत में सादगी व भाईचारे की मिसाल कायम की

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तीन बार लगातार राजस्थान की फतेहपुर विधानसभा से विधायक रहे और 2014 में छोटी सी उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह गए

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जयपुर/फतेहपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजनेताओं की एक छवि होती है, उनके असंख्य समर्थक होते हैं, तो बड़ी संख्या में विरोधी भी होते हैं। राजनेताओं की छवि अच्छी भी होती है और बुरी भी होती है। इस दौर में बड़ी संख्या बुरी छवि के नेताओं की है, अच्छी छवि के नेता कम ही मिलते हैं। और ऐसे नेता तो दिन के उजाले में ढूंढने से भी नहीं मिलते, जिनके कोई विरोधी नहीं हों और उनके सामने चुनाव लड़ने वाले या विरोधी पार्टी के नेता भी उनकी दिल से प्रशंसा करते हों। अगर कोई मिलता है तो वो वाकई इस दौर की राजनीति में एक देवता का रूप है।



राजस्थान का एक कस्बा "फतेहपुर" जो सीकर जिले में स्थित है और इसकी फतेहपुर विधानसभा सीट लोकसभा क्षेत्र के तौर पर झुंझुनूं लोकसभा में आती है। करीब 290 साल पहले यहां कायमखानी नवाबों का शासन था, फतेहपुर कायमखानी रियासत रही है और इसकी स्थापना फतेहपुर के प्रथम नवाब फतेह खां साहब ने की थी, जो नवाब कायम खां साहब के पोते और गोगाजी चौहान के वंशज थे। यहां का विशाल बीहड़, बावड़ी, किला और मकबरे आदि कायमखानी नवाबी काल में ही बनाए गए थे, जो आज भी मौजूद हैं। उस जमाने में इस इलाके को कायमवाटी कहा जाता था, आज इसे शेखावाटी कहा जाता है, क्योंकि कायमखानी रियासतों के खात्मे के बाद इस इलाके का राज शेखावत राजपूतों के पास आ गया था।


इसी फतेहपुर की धरती पर एक ऐसा राजनेता पैदा हुआ है, जिसके कोई विरोधी नहीं थे और विरोधी पार्टी के नेता भी उसकी जमकर प्रशंसा करते थे और आज भी करते हैं। इस नेता का नाम भंवरू खां था, जो पास के रोल-साहबसर गांव के निवासी थे और तीन बार लगातार फतेहपुर से विधायक चुने गए थे। उनका 52 साल की छोटी सी उम्र में 11 साल पहले रविवार की रात 21 दिसम्बर 2014 को इन्तकाल हो गया था। उन्हें उनके पैतृक गांव रोल-साहबसर में अगले दिन सोमवार 22 दिसम्बर दोपहर दो बजे सुपुर्दे ख़ाक किया गया था।


मरहूम विधायक भंवरू खां ने अपने सियासी कॅरिअर की शुरूआत पंचायती राज से की थी। वे सबसे पहले रोल-साहबसर के उप-सरपंच बने और बाद में सरपंच निर्वाचित हुए थे। वे 1998 में 36 साल की छोटी सी उम्र में कांग्रेस पार्टी से विधायक बन थे। यह चुनाव उन्होंने करीब 31 हजार वोटों से जीता था, जो उस वक्त राजस्थान प्रदेश की तीसरी सबसे बड़ी जीत थी। इसके बाद वे 2003 और 2008 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस के सिम्बल पर विधायक निर्वाचित हुए थे।


भंवरू खां जब प्रथम बार विधायक बने तब उनकी उम्र 36 साल थी। वे पूर्व केन्द्रीय मंत्री और झुंझुनूं से सांसद रहे कांग्रेस के कद्दावर नेता शीशराम जी ओला के खासमखास और सियासी शागिर्द थे। उनके बारे में इतना ही कहना काफी है कि फतेहपुर से भाजपा से विधायक रहे और भंवरू खां जी के सामने चुनाव लड़े बनवारीलाल भिंडा साहब ने उनके निधन पर कहा था कि "मैं और भंवरू खां अलग-अलग पार्टियों से थे। आमने-सामने चुनाव भी लड़े, लेकिन कभी उन्होंने कटुता नहीं दिखाई। उन्होंने हमेशा मेरा बड़े भाई की तरह सम्मान किया।"


एक और उदाहरण भंवरू खां की शख्सियत के लिए यह है कि फतेहपुर से विधायक रहे नन्द किशोर महरिया ने उनके निधन पर कहा था कि "मैंने भंवरू खां के सामने क‌ई बार चुनाव लड़ा। एक बात महसूस की, जो यह है कि वे किसी से कटुता नहीं पालते थे। चुनाव के बाद जब भी मिलते थे, तो बेहद खुशमिजाज नजर आते थे। ऐसा कभी नहीं लगता था कि वे चुनाव जीते हैं और दूसरे पार्टी के हैं।" नन्द किशोर महरिया 2013 के चुनाव में भंवरू खां को चुनाव हराकर निर्दलीय विधायक बने थे। इससे पहले वे 2003 और 2008 के चुनावों में भाजपा की टिकट पर फतेहपुर से भंवरू खां के सामने चुनाव लड़ कर हार चुके थे।



12 दिसम्बर 1962 को गांव रोल-साहबसर में वाजिद खां और सलमा बानो के घर पैदा हुए भंवरू खां बहुत ही सादा मिजाज शख्स थे। तीन बार विधायक रहकर भी उन्होंने कोई खास दौलत नहीं बनाई, उनकी दौलत सिर्फ सादगी, शालीनता, भाईचारा और लोगों से सम्मान के साथ बतियाना था। जब उनका इन्तकाल हुआ तो दफ़न में हजारों चाहने वाले लोग मौजूद थे, बड़े बड़े राजनेता भी मौजूद थे, जिनमें राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत भी शामिल थे। 


गहलोत साहब ने पूछा कि भंवरू खां जी का घर कौनसा है, क्योंकि जहां बैठे थे वो साधारण सा घर था। गहलोत साहब को लोगों ने कहा कि यही छोटा सा घर है भंवरू खां जी का जहां हम बैठे हैं। यह सुनकर अशोक गहलोत चौंक गए और कहा "यह घर है भंवरू खां जी का, इसीलिए उनके इतने चाहने वाले हैं, वाक‌ई वे बहुत बड़े नेता थे, जो अपनी सादगी और शराफ़त से लोगों के दिलों पर राज करते थे। उन्होंने राजनीति से माल नहीं बनाया बल्कि लोगों का दिल जीता था।"


इस लेख के यह कुछ अंश हमारी उस किताब से हैं, जो "थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका" के द्वारा "विधायक भंवरू खां" पर लिखी जा रही है, जो शीघ्र ही इन्शाअल्लाह प्रकाशित होगी। वर्तमान में भंवरू खां के छोटे भाई हाकम अली खां कांग्रेस से फतेहपुर के विधायक हैं, वे 2023 में दूसरी बार निर्वाचित हुए हैं। हाकम अली खां और भंवरू खां के साहबजादे हर साल भंवरू खां की बरसी अपने गांव रोल-साहबसर में मनाते हैं। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शरीक होते हैं, इसमें दुआ ए मग्फिरत के साथ ब्लड डोनेशन कैम्प भी आयोजित होता है और युवा वर्ग ख़ून देकर अपने लाडले नेता को ख़िराज ए अक़ीदत पेश करता है।

(20/12/2025)

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