पाकिस्तान के शिया इमामबाड़े में खूनी कोहराम के पीछे किसका हाथ ?
पाकिस्तान के शिया इमामबाड़े में खूनी कोहराम के पीछे किसका हाथ ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। 6 फरवरी को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के तरलाई इलाके में एक शिया इमामबाड़े की मस्जिद में आत्मघाती धमाका हुआ। यह धमाका जुमे की नमाज़ के वक्त हुआ। उस वक्त मस्जिद खचाखच नमाजियों से भरी हुई थी। इस खूनी कोहराम में तीन दर्जन के करीब बेगुनाह लोग मारे गए, 150 से ज्यादा लोग घायल हो गए। पूरी दुनिया में इस खूनी कोहराम की कड़ी निन्दा की गई।
पाकिस्तान हमारे देश के दर्दनाक विभाजन के बाद बना और यह विभाजन दिखने और बताने में तो मजहब के नाम पर और मुसलमानों के नाम पर हुआ, लेकिन असल कहानी इस दर्दनाक विभाजन के पीछे अंग्रेजों की सोची समझी योजना और उनके दलालों की राजनीतिक महत्वाकांक्षा थी।
मुसलमानों के नाम पर बने इस मुल्क में मुसलमानों की कैसी हालत है, किसी से छिपी हुई नहीं है। नफ़रत के पैरोकार तथाकथित उलमा और चोर फौजी अफसरों का वहां एक तरह से कब्जा है। फौज वहां सारे संसाधनों और सत्ता पर काबिज है, लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनी हुई सरकार उसकी कठपुतली है। फौज जिसे चाहे प्रधानमंत्री बना देती है और जिसे चाहे प्रधानमंत्री की कुर्सी से उतारकर फांसी के फंदे पर लटका देती है या सलाखों के पीछे पटक देती है।
नफ़रती मौलाना और उनके समर्थक एक दूसरे गिरोह (फिरकों) के खिलाफ नफ़रत परोसते रहते हैं। ईशनिंदा के नाम पर जबरदस्त जुल्म होता है। वहां न सिर्फ अल्पसंख्यक गैर मुस्लिमों को बल्कि मुसलमानों को भी खूनी कोहराम से बर्बाद किया जा रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि यह सब खूनी कोहराम इस्लाम के नाम पर किया जा रहा है, जबकि इस्लाम का इससे कोई वास्ता नहीं है। यह हिंसा करने वाले लोग दरिंदे और शैतानी ताकतों के गुमराह लोग हैं।
अब सवाल यह है कि इस्लामाबाद के इमामबाड़े में जो खूनी कोहराम मचाया गया उसके पीछे किसका हाथ है ? जिसे आत्मघाती धमाका कर मरना था वो तो मर गया, लेकिन इसका ब्रेनवाश करने वाले, इसे यहां तक तैयार कर भेजने वाले, ऐसी सोच समाज में परोसने वाले सभी के हाथ इस खूनी कोहराम से रंगे हुए हैं।
दूसरी बात यह है कि ईरान शिया बाहुल्य है और वहां हुकूमत भी शिया लीडरशिप के पास है, ईरान को बर्बाद करने के लिए अमेरिका और इसराइल ने दिन रात एक कर रखा है। ईरान और पाकिस्तान की बॉर्डर लगती है, पाकिस्तान में अच्छी खासी संख्या शियाओं की है। लिहाजा यह भी हो सकता है कि इस खूनी कोहराम के पीछे कोई इंटरनेशनल साजिश हो, लेकिन जो भी हो वो शैतानी राक्षस है, जिसने बेगुनाहों का खून बहाया है।
यहां एक बात और, सोशल मीडिया पर पूरी दुनिया में इस खूनी कोहराम की कड़ी निन्दा की गई है। लेकिन हमारे देश के मुस्लिम रहनुमाओं और तंजीमों ने या तो खामोशी बरती या फिर निन्दा की रस्म अदायगी की। यह बहुत ग़लत है। हमारे देश के मुस्लिम रहनुमाओं को इस खूनी कोहराम की खुलकर कठोर शब्दों ने निन्दा करनी चाहिए थी, इनकी यह खामोशी सवाल खड़े करती है कि आपकी निन्दा ऐसे दर्दनाक वाकिये पर सिलेक्टिव क्यों है ?
(09/02/2026)
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-@-फारूक़ अली ख़ान सम्पादक
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