डोटासरा को पीसीसी अध्यक्ष से हटाकर नेता प्रतिपक्ष बनाया जाएगा या नहीं ?
डोटासरा को पीसीसी अध्यक्ष से हटाकर नेता प्रतिपक्ष बनाया जाएगा या नहीं ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान कांग्रेस (पीसीसी) के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा इन दिनों कांग्रेस और सत्ताधारी पार्टी भाजपा दोनों के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। चर्चा इस बात की है कि डोटासरा को पीसीसी अध्यक्ष से कब हटाया जाएगा और क्या उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया जाएगा ? अगर नहीं, तो क्या वे सिर्फ विधायक ही रहेंगे और विधानसभा चुनाव 2028 में उनकी कोई नहीं चलेगी ?
गोविंद सिंह डोटासरा सीकर जिले की लक्ष्मणगढ़ विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे यहां से लगातार चार बार विधायक बने हैं। वे राजस्थान में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार में मंत्री भी रहे हैं। एक मजबूत और बेबाक नेता हैं। जाट समुदाय से सम्बन्ध रखने वाले डोटासरा अपनी भाषण शैली और मंच पर गमछा हिलाकर कार्यकताओं का हौसला बढ़ाने के मामले में पूरे प्रदेश में चर्चित हैं।
डोटासरा का नाम पेपर लीक प्रकरण से जोड़ने का भी सत्ताधारी पार्टी भाजपा कई बार प्रयास कर चुकी है। उन्हें जेल भेजने की सियासी फब्तियां भी कस चुकी है। लेकिन डोटासरा बिना डरे भाजपा और उसकी सरकार को जमकर खरी खोटी सुनाते हैं, विधानसभा के अन्दर भी और बाहर भी।
डोटासरा को तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट की बगावत के बाद 2020 में आनन फानन में पीसीसी अध्यक्ष बनाया गया था, तब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे और डोटासरा को उन्हीं के गुट का समझा जाता है। लेकिन अब डोटासरा का एक अलग गुट स्थापित हो चुका है और गहलोत अपनी सियासी जादूगरी से डोटासरा को हाशिए पर लगाना चाहते हैं। ऐसी चर्चाएं कांग्रेस के सियासी गलियारों में होती हैं।
डोटासरा को पीसीसी अध्यक्ष बने छह साल के करीब हो गए और खबर यह है कि देर सवेर उन्हें हटाया जाएगा। इस बात को डोटासरा भी भली-भांति जानते हैं। इसलिए खबर यह है कि सालभर से नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए वे साम, दाम, दण्ड, भेद यानी सभी फार्मूले आजमा रहे हैं।
विधानसभा में वे सिर्फ विधायक होते हुए भी नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली से बढ़कर बोलने, बेबाकी से बोलने और हर मुद्दे पर मुख्यमंत्री और सरकार को घेरने की कोशिश करते हैं। कांग्रेस के सियासी गलियारों में चर्चा यह भी है कि डोटासरा लगातार टीकाराम जूली को विधानसभा में ओवर टेक करते हैं। इस बात पर सदन में भी भाजपा नेताओं की तरफ से हंसी ठिठोली होती रहती है।
डोटासरा का फार्मूला यह सुना जा रहा है कि वे नेता प्रतिपक्ष बनकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना चाहते हैं। क्योंकि राजस्थान में हर बार सरकार बदलती है और इस फार्मूले से कांग्रेस की सरकार आनी तय मानी जा रही है और यहां आज तक कोई भी जाट मुख्यमंत्री नहीं बन पाया है, इसलिए डोटासरा की दौड़ नेता प्रतिपक्ष के जरिए मुख्यमंत्री के पद की है। इस खबर से सबसे ज्यादा हैरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बताए जा रहे हैं।
गहलोत की मंशा यह बताई जा रही है कि वे डोटासरा को हर हाल में हाशिए पर लगाना चाहते हैं, क्योंकि उन्होंने स्वतंत्र गुट बनाकर मुख्यमंत्री के सपने देखने शुरू कर दिए हैं। गहलोत चाहते हैं कि डोटासरा की जगह उनके चहेते किसी जाट नेता को पीसीसी अध्यक्ष बनवा दिया जाए, ताकि जाट समुदाय की नाराजगी भी नहीं हो और डोटासरा का कांटा भी निकल जाए।
कांग्रेस की चौपालों में चर्चा यह है कि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को हटाना बहुत मुश्किल हो चुका है, क्योंकि एक तो उनके प्रदर्शन से कांग्रेस आलाकमान खुश है। दूसरा वे दलित समुदाय से हैं, तीसरा वे भंवर जितेन्द्र सिंह के चहेते हैं। साथ ही गहलोत भी जूली को नहीं हटवाना चाहते हैं। इसलिए चर्चा यह है कि विधानसभा चुनाव तक नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ही रहेंगे। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि डोटासरा को नेता प्रतिपक्ष तो नहीं बनाया जाएगा।
अब सवाल है कि फिर डोटासरा को पीसीसी से हटाकर क्या वाकई हाशिए पर लगा दिया जाएगा ? इस बारे में कांग्रेस की चौपालों पर चर्चा है कि उन्हें सचिन पायलट की तरह पार्टी महासचिव बनाकर किसी राज्य का प्रभारी बनाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो फिर गहलोत की सियासी चाल सफल मानी जाएगी, क्योंकि वे भी डोटासरा व पायलट को अब राजस्थान से दूर ही रखना चाहते हैं, ताकि 99 के फेर में वे चौथी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बन सकें। 99 का फेर यानी 200 सीटों की विधानसभा में बहुमत से कुछ सीट कम, गहलोत 2008 और 2018 में इसी 99 के फेर से मुख्यमंत्री बने थे।
(25/02/2026)
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